By अभिनय आकाश | Dec 03, 2024
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले थामे नहीं थम रहे। राजधानी ढाका में एक बहुत बड़ी कट्टरपंथी यात्रा निकली है जिसमें एस्कॉन और हिंदुओं को अल्लाह-हू-अकबर के नाम के साथ काटने के नारे लग गए। वैध यात्रा दस्तावेजों के साथ भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के दर्जनों सदस्यों को बांग्लादेश की आव्रजन पुलिस ने बेनापोल सीमा पर वापस भेज दिया। वहीं उनके वकील पर जानलेवा हमला भी किया गया। बांग्लादेश में जिस वक्त हिंदुओं के साथ इस तरह का व्यवहार हो रहा था ठीक उसी दिन, ढाका में चीनी दूतावास ने इस्लामी राजनीतिक दलों के नेताओं के लिए एक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी, हिफाज़त-ए-इस्लाम बांग्लादेश, खिलाफत मजलिस, बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन और निज़ाम-ए-इस्लाम पार्टी के प्रतिनिधि, जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण थे।
जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान और ईरान जैसे देशों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटे चीन की नजर बांग्लादेश पर भी है। इसी कोशिश के नतीजे में उसने बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को आमंत्रित किया है। चीन की मंशा भारत के साथ तनावपूर्ण स्थिति का फायदा उठाने की है। शेख हसीना की सरकार को भारत का करीबी माना जाता था। लेकिन बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शासन का मिजाज भी पटलता नजर आ रहा है।