'इमरजेंसी में जेपी ने पूरे विपक्ष को एक किया', अमित शाह बोले- जो लोग खुद को उनका शिष्य बताते हैं, उन्होंने उनकी विचारधारा को तिलांजलि दे दी

By अकित सिंह | Oct 11, 2022

गृह मंत्री अमित शाह आज बिहार के सारण पहुंचे है। इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को संबोधित भी किया। भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर अमित शाह ने आज विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने अपना पूरा जीवन भूमिहीनों के लिए, गरीबों, दलितों और पिछड़ों के लिए गुजारा है। उन्होंने समाजवाद की विचारधारा और जाति विहीन समाज की रचना की कल्पना लेकर अनेकों परिकल्पनाएं कीं। अमित शाह ने सिताब दियारा में कहा ने कहा कि जो लोग खुद को जयप्रकाश नारायण का शिष्य बताते हैं, उन्होंने उनकी विचारधारा को तिलांजलि दे दी। 

 

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मैं आज बिहार की जनता से पूछना चाहता हूं कि जेपी आंदोलन से ऊंचाईयां हासिल करने वाले नेता आज सिर्फ सत्ता के लिए कांग्रेस की गोद में उनका नाम लेकर बैठे हैं-क्या आप उनके साथ हैं? क्या यह जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों की राजनीति है? नीतीश पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके (जयप्रकाश नारायण) द्वारा दिखाया गया मार्ग नहीं है। उन्होंने सत्ता के लिए कभी कुछ नहीं किया और जीवन भर सिद्धांतों के लिए काम किया। आज सत्ता के लिए 5 बार पाला बदलने वाले आज बिहार के सीएम हैं।  भाजपा नेता ने आगे कहा कि जब 70 के दशक में भ्रष्टाचार और सत्ता में चूर शासन के अधिकारियो ने देश में इमरजेंसी डालने का काम किया, तब जयप्रकाश जी ने उसके खिलाफ बहुत बड़ा आंदोलन किया। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हजारीबाग की जेल जिस​को न रोक सकी। उस जयप्रकाश को इंदिरा जी की यातना न रोक पाई। शाह ने आगे कहा कि जब इमरजेंसी उठी तो जेपी जी ने पूरे विपक्ष को एक किया और देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का काम जयप्रकाश नारायण जी ने किया। 

 

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शाह ने कहा कि आज देश में मोदी जी के नेतृत्व में सरकार चल रही है, 8 साल से जयप्रकाश जी के सिद्धांत से और विनोबा जी के सिद्धांत से सर्वोदय के नारे को मोदी जी ने अंत्योदय के साथ जोड़कर गरीबों का कल्याण करने का काम किया।उन्होंने कहा कि 1973 में, इंदिरा जी के नेतृत्व में, गुजरात में कांग्रेस की सरकार थी, जिसमें चिमन पटेल मुख्यमंत्री थे। इंदिरा जी ने सार्वजनिक रूप से सरकारों को पैसा इकट्ठा करने का काम दिया, भ्रष्टाचार शुरू हुआ। गुजरात में छात्रों ने विरोध किया और इस आंदोलन का नेतृत्व जयप्रकाश नारायण ने किया। इसने गुजरात में सरकार बदल दी। इसके बाद उन्होंने बिहार में एक आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन को देखकर बिहार के गांधी मैदान में रैली करने वाली इंदिरा गांधी परेशान हो गईं। देश के पीएम को देश में आपातकाल लगाने और जयप्रकाश नारायण को जेल में डालने के लिए मजबूर किया गया।  

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