20 साल और विपक्ष में बैठ जाएंगे मगर बाबरी मस्जिद बनाने की बात करने वालों से समझौता नहीं करेंगेः अमित शाह

By नीरज कुमार दुबे | Apr 10, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर चुनावी मैदान में एक बड़ा दांव चल दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोलकाता में इस संकल्प पत्र को जारी करते हुए साफ संकेत दे दिया कि इस बार मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं बल्कि विचार और विश्वास का भी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता डर, निराशा और अव्यवस्था से त्रस्त है और अब बदलाव चाहती है।

सबसे ज्यादा चर्चा समान नागरिक संहिता को लेकर हो रही है। अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि सत्ता में आते ही छह महीने के भीतर इसे लागू किया जाएगा। इसके साथ ही अवैध घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही गई है। भाजपा ने सीमा पर गौ तस्करी रोकने, आयुष्मान योजना को पूरी तरह लागू करने और महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने जैसे वादे भी किए हैं।

संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले वर्षों में राज्य में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हुई है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सत्ता में आने पर कथित घोटालों और कानून व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी किया जाएगा और जांच तेज गति से होगी। हुमायूं कबीर प्रकरण पर अमित शाह ने यह तक कह दिया कि भाजपा किसी भी कीमत पर उन लोगों के साथ गठबंधन नहीं करेगी जो बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा भले 20 साल और विपक्ष में बैठना पसंद करेगी लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी।

हुमायूं कबीर की सफाई

इसी बीच हुमायूं कबीर विवाद ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा जारी एक कथित वीडियो में कबीर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं जिसमें उनके भाजपा से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को प्रभावित करने की रणनीति की बात कही गई है। वीडियो में कथित तौर पर धन के लेनदेन और बड़े स्तर की योजना का भी जिक्र है। तृणमूल ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय से जांच की मांग कर दी है।

हालांकि हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश करार दिया है और मानहानि का मुकदमा करने की बात कही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने भी कबीर की पार्टी से दूरी बना ली है, जिससे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।

ममता बनर्जी का पलटवार

उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सांप पर भरोसा किया जा सकता है लेकिन भाजपा पर नहीं। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल को और ज्यादा आक्रामक बना दिया है। ममता बनर्जी लगातार भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगा रही हैं, जबकि भाजपा राज्य में परिवर्तन और विकास का नारा बुलंद कर रही है।

देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है। एक तरफ भाजपा अपने वादों और आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अपने गढ़ को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। हुमायूं कबीर विवाद, ओवैसी की उनकी पार्टी से दूरी और ममता बनर्जी के तीखे बयान इस चुनाव को और ज्यादा जटिल बना रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव सिर्फ वादों का नहीं बल्कि विश्वसनीयता का भी है। जनता किस पर भरोसा करती है, यही तय करेगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि चुनावी जंग अपने चरम पर है और आने वाले दिनों में आरोप प्रत्यारोप का दौर और तेज होने वाला है।

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