By एकता | Nov 01, 2026
दिल्ली में विपक्षी इंडिया गठबंधन की महारैली को लेकर सियासी घमासान जारी है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ से कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस दिन दिल्ली में रैली आयोजित की है, वह दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
अमित शाह ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को कांग्रेस से जुड़े लोगों द्वारा भड़काए गए दंगों में दिल्ली में हजारों सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को जिंदा जला दिया गया और हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
शाह ने कहा कि इन दंगों में कई बच्चे अनाथ हुए, महिलाएं विधवा हुईं और परिवारों के घर तबाह हो गए। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा, "जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है।" शाह ने कहा कि हजारों सिखों के नरसंहार को इस तरह बयान करना बेहद दुखद था। उनके मुताबिक, उस समय कांग्रेस के नेता ही इस तरह की बात कह सकते थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की दोबारा जांच कराई गई। उन्होंने कहा कि दंगों के आरोपियों के खिलाफ मामले फिर से खोले गए और पीड़ितों को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। शाह ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को जेल भेजा गया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश ने पहले कभी नहीं देखा कि किसी राजनीतिक पार्टी ने इस तरह दंगे भड़काए हों।
अमित शाह ने राहुल गांधी की दिल्ली रैली के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के बाद अब उनके बेटे राहुल गांधी ने भी उसी तारीख पर बड़ी रैली आयोजित की है।
शाह ने कहा, "ये रैली दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।" उन्होंने बताया कि बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस से अपील की थी कि वह 1, 2 और 3 नवंबर को कोई कार्यक्रम न रखे। शाह के मुताबिक, इन तारीखों पर सिख-विरोधी दंगे हुए थे और ऐसे में रैली से सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस अपील को नजरअंदाज किया। शाह ने यह भी दावा किया कि विदेश से आदेश मिले थे कि रैली उसी दिन आयोजित की जाए, जिस दिन हजारों सिखों को जिंदा जलाया गया था। उन्होंने कहा, "गुरुओं की इस धरती से, मैं इस घिनौनी कोशिश की कड़ी निंदा करता हूं। मैं इसकी निंदा करता हूं। भारत और पंजाब इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।"
अमित शाह ने कांग्रेस के मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मैं राहुल जी को कहना चाहता हूं, आपको प्रधानमंत्री बनना है तो पूरा जीवन मॉक पार्लियामेंट में ही बने रहिए, आपका नंबर कभी नहीं लगना है।"
अमित शाह ने दिल्ली में विपक्ष की रैली के समय को लेकर व्यापारियों की परेशानी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दीपावली के आसपास दिल्ली के थोक बाजारों में कारोबारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान देशभर से लोग खरीदारी करने दिल्ली आते हैं। मिठाई, पटाखों और कपड़ों समेत कई सामानों का बड़े स्तर पर कारोबार होता है।
शाह के मुताबिक, व्यापारियों ने कांग्रेस से अपील की थी कि वह दीपावली के बाद रैली आयोजित करे। इसके लिए कारोबारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पत्र लिखकर अपनी परेशानी भी बताई थी। उन्होंने दावा किया कि त्योहारों के दौरान तीन-चार दिनों में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। ऐसे में रैली की वजह से छोटे व्यापारियों को नुकसान होने की आशंका थी। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने व्यापारियों की अपील पर ध्यान नहीं दिया और उनकी परेशानियों को नजरअंदाज किया।
अमित शाह ने दिल्ली में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। शाह ने दावा किया कि आने वाले तीन चुनावों में भी कांग्रेस को दिल्ली में सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि रैली के कारण छोटे व्यापारियों को हुए नुकसान का जवाब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से भी देना पड़ेगा।