अमिताभ बच्चन के पैतृक गांव बाबूपट्टी के पुस्तकालय को दिवाली तक मिलेंगी किताबें, डीएम ने दिया भरोसा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 11, 2026

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बाबूपट्टी गांव के निवासी इन दिनों खुश हैं क्योंकि अभिनेता अमिताभ बच्चन के पैतृक गांव के लोगों को उम्मीद है कि करीब दो दशक पहले किया गया उनसे एक वादा अब पूरा हो सकता है। पट्टी तहसील के निवासी चंद्रप्रकाश तिवारी ने लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) में हिस्सा लिया, जिसके बाद यह उम्मीद जगी। कार्यक्रम के दौरान अमिताभ बच्चन ने अपने परिवार का इस क्षेत्र से संबंध स्वीकार किया।

उन्होंने दौरे के दौरान पुस्तकालय के लिए किताबें उपलब्ध कराने और गांव में एक बालिका महाविद्यालय स्थापित करने का सार्वजनिक रूप से वादा किया था। करीब 20 साल बाद, सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रसारित ‘केबीसी’ के एक एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने पट्टी तहसील के निवासी चंद्रप्रकाश तिवारी से बातचीत के दौरान अपने परिवार का इस क्षेत्र से संबंध स्वीकार किया। इसके बाद गांव के लोगों में पुराने वादे पूरे होने की उम्मीद फिर से जगी है।

अमिताभ बच्चन ने रविवार को अपने 84वें जन्मदिन पर अपने पिता के जन्मस्थान का जिक्र किया। उन्होंने लंबे समय से गांव नहीं आ पाने पर अफसोस जताया और पुस्तकालय के लिए किताबें उपलब्ध कराने का वादा किया। अमिताभ की इस घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन का भी ध्यान इस ओर गया है।

जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने बुधवार शाम बाबूपट्टी गांव का दौरा किया और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि दिवाली से पहले पुस्तकालय में किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। ग्राम प्रधान विकास यादव के अनुसार, जिलाधिकारी ने कहा, “दिवाली तक पुस्तकालय किताबों से पूरी तरह भर जाएगा। त्योहार के दौरान यह किताबों और मिट्टी के दीयों, दोनों से रोशन होगा।” बाबूपट्टी प्रसिद्ध हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्मस्थान है।

हिंदी साहित्य की प्रमुख हस्तियों में शामिल हरिवंश राय बच्चन के कारण इस गांव का बच्चन परिवार से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। जिस स्थान पर अब पुस्तकालय की इमारत बनी है, वहां कभी अमिताभ बच्चन के दादा प्रताप नारायण श्रीवास्तव का घर हुआ करता था। बाद में हरिवंश राय बच्चन शिक्षा के लिए प्रयागराज चले गए, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, उनका अपने पैतृक घर और गांव से गहरा जुड़ाव बना रहा।

पुस्तकालय की इमारत बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन किताबों और अन्य पठन सामग्री की कमी के कारण इसका अब तक समुचित उपयोग नहीं हो सका है। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में बनाए गए इस पुस्तकालय का उद्देश्य अभी पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों को इंतजार है कि यहां किताबें उपलब्ध हों और विद्यार्थी तथा अन्य पाठक इसका लाभ उठा सकें।

हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा ‘क्या भूलूं क्या याद करूं’ में गांव के लोगों के साथ अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि माघ महीने में जब लोग गंगा में स्नान करने के लिए प्रयागराज आते थे, तो गांव के लोग उनके घर पर ठहरा करते थे। गांव के लोग अपने साथ घर में बने पकवान भी लाते थे, जिन्हें हरिवंश राय बच्चन स्नेहपूर्वक स्वीकार करते थे।

उनकी आत्मकथा के अनुसार, उनका घर पैतृक गांव से आने वाले लोगों के लिए हमेशा खुला रहता था। गांव के लोगों की यादों में पुस्तकालय का अधूरा वादा लंबे समय से बना हुआ है। यही वजह है कि अमिताभ बच्चन की ओर से हाल में दिए गए आश्वासन से ग्रामीणों और बच्चन परिवार के विस्तारित सदस्यों में एक बार फिर उम्मीद जगी है।

हरिवंश बच्चन के संपर्क में रहने वाले परिवार के सदस्य दिवंगत शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के पौत्र अमित श्रीवास्तव और उनकी पत्नी मीनाक्षी श्रीवास्तव ने कहा कि अमिताभ बच्चन के बयान से उनकी यह उम्मीद फिर जगी है कि वह एक दिन गांव आएंगे और अपने पैतृक घर पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

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