एमी विर्क और तानिया का 'सुफना' प्यार अंधा नहीं समझदार है, दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी

By रेनू तिवारी | May 14, 2020

पंजाबी सिनेमा धीरे-धीरे करके अपना दायरा बढ़ाता जा रहा हैं। पंजाबी सिनेमा से निकलकर कुछ एक्टर और एक्ट्रेस बॉलीवुड तक पहुंच चुके हैं। पंजाबी फिल्में अभी रफ्तार में बॉलीवुड से थोड़ा पीछे हैं लेकिन पंजाबी गानों ने लोकप्रियता के मामलों में बॉलीवुड की कमर तोड़ रखी हैं। पंजाबी के सिनेमा की जो मैंने खासियत देखी है वह ये है कि वह कम साधन और कम बजट में भी काफी कुछ नया एक्सपेरीमेंट कर लेते हैं। कई बार ये एक्सपेरीमेंट हिट भी होता है और कई बार फ्लॉप भी होता है लेकिन वहां लोग कुछ नया करने में नहीं चूकते। ऐसा ही एक प्रयोग फिल्म 'सुफना' के साथ किया गया। ये प्रयोग इतना शानदार था कि फिल्म 'सुफना' से बॉलीवुड के निर्देशकों को भी कुछ सिखन चाहिए। 14 फरवारी 2020 को सिनेमाघर में पंजाबी फिल्म 'सुफना' रिलीज हुई। फिल्म में लीड रोल में पंजाबी एक्टर और सिंगर एमी विर्क और एक्ट्रेस तानिया हैं। फिल्म 'सुफना' की रिलीज केवल पंजाब तक ही सीमित थी। दिल्ली मुंबई में सुफना का ज्यादा सिनेमाघरों की स्क्रिन पर नहीं रिलीज होने का मौका मिला। फिल्म सभी के लिए अमेजन प्राइम पर रिलीज कर दिया गया हैं।  

फिल्म सुफना एक लव स्टोरी हैं। ये लव स्टोरी दूसरी प्यार की कहानियों से अलग हैं। फिल्म में एक पंड (गांव) दिखाया गया है जहां एक प्यारी से बच्ची अपने फौजी पिता की वर्दी से अपने दिल की बात करती हैं। तभी उसकी ताई आकर उसे खरी-खोटी सुनाते हुए घर के चूल्हे-चौके में लगा देती हैं। बच्ची इतनी मासूस होती हैं कि उसे ताई की बाते बुरी नहीं लगती और वह अपने पिता के आने के इंतजार में राहे ताकती रहती हैं। फिल्म में अब लड़की अपने पिता का इंतजार करते-करते बड़ी हो जाती हैं।

रूई के खेत में काम करके लड़की (तानिया) के परिवार का गुजारा होता हैं। लड़की कपास के खेत में बहुत सारे मजदूरों के साथ काम करती हैं। एक दिन लड़की की मुलाकात एक लड़के (एमी विर्क) से होती है। फिल्म में दोनों की मुलाकातें बढ़ती हैं और दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता हैं। यहां दोनों के बीच प्यार पनपने का सफर काफी शानजार है जिसे पढ़ कर नहीं आप देखकर समझ पाएंगे। कहानी आगे बढ़ती है एक दिन लड़की दूसरों के घर काम कर करके अपने घर का गुजारा करती हैं। लड़के का पढ़ाई में मन नहीं होता लेकिन अपने भाई के कहने से वह कॉलेज जाता हैं। एक दिन लड़की को पता चलता है कि लड़के के पिता ने कर्ज ज्यादा बढ़ जाते के कारण अत्महत्या कर ली थी। लड़की चाहती है कि लड़का कुछ बन जाए और अपने पिता के कर्ज को खत्म करके अपनी जमीन वापस ले ले। ये बात लड़के को पसंद नहीं आती उसे लगता है कि लड़की क प्यार नहीं बल्कि नौकरी करने वाले की चाह है। दोनों अलग हो जाते हैं। लेकिन लड़की का प्यार बिलकुल नहीं बदलता वह अपने जीत के लिए गांव में दुआ करती हैं और उसी से प्यार करके उसका इंतजार करती हैं। इस बात से बेखबर लड़की पढ़ाई करने शहर चला जाता हैं।

एक दिन जीत का दोस्त उसे फोन पर बताता है कि लड़की (गीत) आज भी उसी से प्यार करती हैं और उसके लिए दुआ करती हैं। ये बात सुनकर जीत वापस पिंड आ जाता हैं।

दोनों की गलतफहमी खत्म होती है लेकिन अभी भी गीत जीत से एक अच्छी से नौकरी करने के लिए कहती है। जीत अपनी गीत के सपने पूरा करके के लिए दिन रात मेहनत करता है। फिर अचानक फिल्म में गीत की ताई उसकी शादी तय कर देती है। गीत की शादी 80 हजार रूपए के सौदे पर तय की जाती हैं। नौकरी के लिए पेपर दे रहा जीत अपनी गीत से कहता है कि कुछ भी करके प्लीज दो दिन शादी को टाल दे मैं आ जाउंगा। अब गीत और जीत अपने प्यार को पूरा करने के लिए जो कुछ करते हैं वह चीज इस कहानी को बाकि प्रेम कहानियों से अलग बनाती हैं। 

डायरेक्शन और कहानी

फिल्म का डायरेक्शन पंजाबी फिल्मों के निर्देशक जगदीप सिंधू ने किया हैं। फिल्म का डायरेक्शन और कहानी ही फिल्म की जान है। एक बहुत ही साधरण की लव स्टोरी को फिल्म के डायरेक्टर ने इतना जानदार बनाया है कि ये फिल्म एक परफेक्ट सिनेमा को टक्कर देने के काबिल हैं। फिल्म में जो कुछ हो रहा है वह सच लगे इसके लिए भी पूरी शूटिंग पंजाब के गांव में की गई है। लोकेशन एकदम ऑरिजनल हैं। फिल्म की कहानी एक सच्चे प्यार की कहानी है लेकिन कहानी के प्यार केवल भावनाओं वाला नहीं दिखाया है। फिल्म की कहानी में दिखाया है कि एक लड़की एक लड़के से बहुत प्यार करती है लेकिन वह आने वाले सच को भी देखती हैं। लड़की प्यार में अपने आपको कुर्बार कर चुकी होती है लेकिन वह अपना प्यार जिसपर कुर्बान करती है वह परख कर करती है। फिल्म से ये कहने की कोशिश की गई है प्यार कभी किसी को पाने या हासि करने के लिए नहीं किया जाता। गीत को जीत की ये नियत अच्छी लगती है उनका मानना है कि जो इंसान मुझे बिना किसी चाहत के प्यार करता है वहीं मेरा साथी है। इस कहानी में प्यार अंधा नहीं है बस समझदार है । 

फिल्म की कास्ट

एमी विर्क एक ऐसे एक्टर है जिसके चेहरे पर भाव काफी समझ आते हैं खास तौर पर जब वह टूटे दिल से जुड़े हो। पंबाजी सिनेमा में एमी को काफी पसंद किया जाता हैं। साथ भी तानिया की बतौर लीड एक्ट्रेस ये पहली फिल्म हैं। जिसमें उन्होंने कमाल की एक्टिंग की हैं। वह काफी खूबसूरत भी लग रही हैं। 

फिल्म सुफना का म्युजिक 

फिल्म के गाने लाजवाब है। फिल्म के गानों को मशहूर गीतकार जानी ने लिखा है और एमी विर्क और बी प्राक ने गानों को आवाज दी है। फिल्म में कबूल हैं गाना बहुत इमोशन और भाव से भरा हुआ है। वही बी प्राक की आवाज में जन्नत गाना शानदार है। किन्ना सोना गाना एमी विर्क ने गाया हैं।

फिल्म सुफना- 4.5 स्टार  

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