White House में India के Tariff पर मचा था बवाल, Donald Trump ने अधिकारियों को सरेआम किया खारिज

By Ankit Jaiswal | Jun 24, 2026

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक नया खुलासा सामने आया है। एक नई पुस्तक में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले शुल्क संबंधी अपनी ही सरकार के आधिकारिक आंकड़ों को मानने से इनकार कर दिया था। ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर कम से कम 175 प्रतिशत शुल्क लगाता है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों के पास उपलब्ध आंकड़े इससे काफी कम थे।

मौजूद जानकारी के अनुसार यह घटना उस समय की है जब ट्रंप प्रशासन अप्रैल 2025 में घोषित किए गए अपने बड़े व्यापारिक अभियान की तैयारी कर रहा था। इसी अभियान के तहत अमेरिका ने कई देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की नीति अपनाई थी। पुस्तक में दावा किया गया है कि ट्रंप अपने अधिकारियों से चीन और भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले शुल्क के स्पष्ट आंकड़े मांग रहे थे।

बताया गया है कि अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने ट्रंप को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा तैयार किए गए आधिकारिक आंकड़े दिखाए। हालांकि ट्रंप इन आंकड़ों से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इन्हें गलत बताते हुए खारिज कर दिया। पुस्तक के अनुसार ट्रंप बार-बार यह कहते रहे कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर वास्तविकता में कहीं अधिक शुल्क लगाता है।

गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से भारत के शुल्क ढांचे और अन्य व्यापारिक बाधाओं को लेकर चिंता जताता रहा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क रहा है कि भारत कृषि उत्पादों, वाहनों और कुछ अन्य वस्तुओं पर अपेक्षाकृत अधिक शुल्क लगाता है। व्हाइट हाउस की एक जानकारी के अनुसार भारत में कुछ कृषि उत्पादों पर औसत शुल्क 37 प्रतिशत तक पहुंचता है, जबकि कुछ वाहनों पर यह 100 प्रतिशत से भी अधिक बताया गया था।

ट्रंप के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भी एक समय भारत को शुल्कों का "महाराजा" बताया था। उन्होंने अमेरिका द्वारा अपनाई गई सख्त व्यापारिक नीति का बचाव करते हुए कहा था कि भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों के लिए कई तरह की बाधाएं मौजूद हैं।

बता दें कि अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था। इसके बाद अगस्त 2025 में रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के मुद्दे पर भारत पर 25 प्रतिशत और शुल्क लगा दिया गया। इससे कई भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

इन फैसलों के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत प्रभावित हुई थी। साथ ही भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को रोकने को लेकर ट्रंप के दावों ने भी दोनों देशों के संबंधों में अतिरिक्त तनाव पैदा किया था, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया था।

हालांकि कई महीनों की बातचीत और मतभेदों के बाद फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापारिक ढांचे पर सहमति बनाई। इस व्यवस्था के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई। वहीं रूस से तेल खरीद को लेकर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी हटा दिया गया।

इसके बदले भारत ने कई अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने या समाप्त करने का प्रस्ताव दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को फिर से सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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