Asian Games Squash: Anahat Singh और अभय सिंह फाइनल में हारे, भारत को मिला रजत

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 27, 2026

(अजय मसंद) नागोया, 27 सितंबर भारत का स्क्वाश में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक का इंतजार जारी रहा जब अनाहत सिंह और अभय सिंह को रविवार को यहां एशियाई खेलों के फाइनल में अपने-अपने मलेशियाई प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अभय पुरुष एकल फाइनल में ईन यो एनजी के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करने में नाकाम रहे और सीधे गेम में 44 मिनट में 9-11, 5-11, 5-11 से हार गए। अट्ठारह वर्षीय अनाहत को भी महिला एकल फाइनल में मलेशिया की शिवासांगरी सुब्रमण्यम ने आसानी से हराया।

स्क्वाश में किसी भी भारतीय ने अब तक व्यक्तिगत वर्ग में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक नहीं जीता है। सौरव घोषाल भी दो बार इसके करीब पहुंचे थे लेकिन उन्हें भी 2014 के इंचियोन और 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। यो और शिवासांगरी दोनों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले शुरुआती दो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा।

दोनों ने अपने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक का भी सफलतापूर्वक बचाव किया। विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली पहली भारतीय अनाहत शनिवार को जापान की दुनिया की छठे नंबर की खिलाड़ी सातोमी वातानाबे के खिलाफ सेमीफाइनल में की गई वापसी को दोहरा नहीं सकीं। अनाहत-सातोमी सेमीफाइनल को करीब से देखने वाली शिवासांगरी स्पष्ट रणनीति के साथ उतरीं और उसे पूरी तरह से अमल में भी लाईं।

मलेशियाई खिलाड़ी ने अनाहत को लगातार विनर्स लगाने का मौका नहीं दिया और लगातार आक्रमण के जरिए उन पर दबाव बनाए रखा। हालांकि अनाहत के लिए यह अभियान यादगार रहा। उन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में महिला एकल फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया।

इससे पहले 26वीं रैंकिंग वाले अभय भी दुनिया के 18वें नंबर के यो को कड़ी चुनौती नहीं दे सके। यो ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। यह अभय की मलेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ आठवीं हार है।

अभय ने कहा, ‘‘आज के प्रदर्शन से निराश हूं लेकिन अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करता हूं। आज वह मेरे से बेहतर था और जीत का हकदार था। उसने खेल के हर पहलू में अच्छा प्रदर्शन किया।

उसका अनुभव काम आया। वह इससे पहले एशियाई खेलों के फाइनल में खेल चुका है इसलिए मुझे लगता है कि इससे थोड़ा फर्क पड़ा।’’ अभय के लिए यह हार बड़े मुकाबलों में दबाव संभालने का सबक भी रही। उन्होंने कहा, ‘‘बड़े मुकाबलों में उसका संयम सीखने लायक है।

हर जीत या हार एक सबक होती है जिसे घर वापस ले जाना होता है और मैं भी यही करूंगा।’’ अभय के पास इस निराशा पर ज्यादा समय तक विचार करने का वक्त नहीं है क्योंकि उनकी नजरें लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इस समय ज्यादा कुछ कहना थोड़ा मुश्किल है लेकिन उस स्थान के लिए अभी एक और मौका है। उम्मीद है कि चीजें सही दिशा में जाएंगी और मैं उसे हासिल कर पाऊंगा।’’ भारत को टीम स्पर्धाओं में भी पदक जीतने की उम्मीद है।

पुरुष टीम मौजूदा चैंपियन के रूप में प्रतियोगिता में उतरेगी।

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