घुसपैठियों और अतिक्रमणकारियों के पास अचानक इतने पत्थर कहां से आ जाते हैं?

By नीरज कुमार दुबे | May 21, 2026

मुंबई के लिए मुसीबत बने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को पुलिस और प्रशासन ने करारा सबक सिखाकर देश की आर्थिक राजधानी को बड़ी राहत दिलाई है। बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास गरीब नगर इलाके में पश्चिम रेलवे द्वारा चलाया जा रहा अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान न केवल रेलवे भूमि को मुक्त कराने की दिशा में अहम कदम साबित हुआ, बल्कि इस कार्रवाई ने यह भी उजागर कर दिया कि किस तरह अवैध कब्जाधारी कानून व्यवस्था को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हटते। कार्रवाई के दौरान पुलिस और रेलवे अधिकारियों पर जमकर पत्थरबाजी की गई, जिससे एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया कि देश के किसी भी हिस्से में अतिक्रमण हटाने या अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलते ही इन घुसपैठियों और अतिक्रमणकारियों के पास अचानक इतने पत्थर कहां से आ जाते हैं?

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रेलवे अधिकारियों के मुताबिक यहां कई बहुमंजिला झुग्गियां फुटओवर पुलों की ऊंचाई से भी ऊपर तक बना दी गई थीं। इससे भविष्य की रेलवे परियोजनाओं और ट्रेनों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो रही थी। रेलवे लंबे समय से इस भूमि को खाली कराना चाहता था, क्योंकि बांद्रा स्टेशन और बांद्रा कुर्ला परिसर के पास स्थित यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस मामले में कानूनी प्रक्रिया वर्ष 2017 से पहले शुरू हो चुकी थी। सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 27 नवंबर 2017 को बेदखली आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद मामला बंबई उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। इस वर्ष 29 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने अवैध अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी थी। बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी इस आदेश पर रोक नहीं लगाई। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी।

पश्चिम रेलवे ने करीब पांच सौ झुग्गियों को हटाने के लिए चिन्हित किया, जबकि संयुक्त सर्वेक्षण में पात्र पाए गए लगभग एक सौ ढांचों को फिलहाल नहीं छुआ गया। रेलवे का कहना है कि भविष्य में इस जमीन का उपयोग उपनगरीय और लंबी दूरी की रेल सेवाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा। कार्रवाई को सफल बनाने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। करीब चार सौ पुलिसकर्मी, चार सौ रेलवे सुरक्षा बल और सरकारी रेलवे पुलिस के जवान तथा लगभग दो सौ रेलवे अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए। बांद्रा स्टेशन और बांद्रा टर्मिनस के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया गया, जिससे भारी यातायात जाम लग गया और यात्रियों को सामान लेकर पैदल चलना पड़ा।

शुरुआत में कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी, लेकिन दूसरे दिन दोपहर बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। अधिकारियों ने जब एक अवैध मस्जिद और वहां लगाए गए निजी दूरसंचार टावर को हटाने की कोशिश की तो भीड़ उग्र हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक टीमों पर पत्थर, बर्तन और अन्य सामान फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

इस हिंसा में सात पुलिसकर्मी और छह प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लिया और निर्मल नगर पुलिस थाने में गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। घायलों का उपचार भाभा अस्पताल और वीएन देसाई अस्पताल में कराया गया। एक पुलिसकर्मी और एक प्रदर्शनकारी को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, हालांकि दोनों की हालत स्थिर बताई गई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख ने चेतावनी दी है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर कुछ निवासियों ने दावा किया कि वह कई दशकों से यहां रह रहे थे और उनके पास हाउस टैक्स, वाटर टैक्स तथा बिजली कनेक्शन से जुड़े दस्तावेज भी हैं। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था भी नहीं की गई। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ईद से ठीक पहले की गई कार्रवाई ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि इन दावों और मानवीय पक्ष के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अवैध कब्जों के खिलाफ हर कार्रवाई के दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं क्यों सामने आती हैं? चाहे देश का कोई भी राज्य हो, अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन पर हमला करना अब एक तयशुदा रणनीति जैसा दिखाई देता है। इससे साफ है कि कुछ तत्व कानून व्यवस्था को बिगाड़कर सरकारी कार्रवाई को रोकना चाहते हैं। मुंबई जैसे संवेदनशील और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर में इस तरह की हिंसा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और शहरी व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती भी है।

-नीरज कुमार दुबे

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