Ankita Bhandari Murder Case: Dushyant Gautam की नियुक्ति पर प्रदर्शन, रिहाई के बाद दी चेतावनी

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड से कथित तौर पर जुड़े एक ‘‘वीआईपी’’ की संवैधानिक पद पर नियुक्ति रोकने की मांग को लेकर यहां इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता को बृहस्पतिवार तड़के हिरासत में लिया गया हालांकि उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। अंकिता के माता-पिता को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के विरोध में इंडिया गेट के पास प्रदर्शन कर रहे थे। हिरासत के दौरान अंकिता के पिता ने केंद्र सरकार को गौतम की नियुक्ति रद्द करने की 24 घंटे की समयसीमा दी।

सितंबर 2022 में हुई इस हत्या के समय गौतम भाजपा की उत्तराखंड इकाई के प्रभारी थे। अंकिता के पिता ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘हम सरकार को दुष्यंत की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का वक्त देते हैं। यदि सरकार हमारी मांग नहीं मानती है, तो देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।’’ अंकिता के माता-पिता के अलावा कांग्रेस के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया, जिनमें पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा, सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत और भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब शामिल हैं।

बाद में इन सभी को रिहा कर दिया गया। अंकिता के माता-पिता का कहना है कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है और इसके पूरा होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। भाजपा नेता गौतम का नाम अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं की ओर से बार-बार इस मामले में कथित रूप से जुड़े उस ‘‘वीआईपी’’ के तौर पर उठाया जाता रहा है, जिसकी पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

गौतम को सोमवार को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अंकिता ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। उनकी 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी।

चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को दोषी ठहराया गया था। तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

पुलकित भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है। अंकिता हत्याकांड उस समय राजनीतिक रूप से चर्चा में आया, जब अपराध में एक अज्ञात ‘‘वीआईपी’’ के कथित तौर पर शामिल होने के आरोप सामने आए थे। अंकिता के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहलू की जांच की मांग की है।

गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही शुरू की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गौतम की नियुक्ति उन्हें बचाने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी का तर्क है कि राज्यपाल पद पर रहते हुए किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।

गौतम भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं। वह उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी के रूप में भी काम कर चुके हैं।

प्रमुख खबरें

दिल्ली प्रदर्शन में NSUI कार्यकर्ता पर हमले को लेकर Kerala Police ने दर्ज की Zero FIR

Education और Innovation को बढ़ावा देने के लिए 15 October को मनाते हैं World Students Day

सुपरस्टार Rajinikanth की Jailer 2 का जलवा! पहले दिन की एडवांस बुकिंग में कमाए 60 करोड़ रुपये से ज्यादा

North Korea ने पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दागीं क्रूज मिसाइलें, सबमरीन वेपन सिस्टम का किया परीक्षण