By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 08, 2026
मनसा, आठ नवंबर पंजाब में पिछले महीने मारे गए मादक पदार्थ विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का शव रविवार को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक स्थान मनसा लाया गया। झोटा की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस पर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। शनिवार को चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में पोस्टमार्टम के बाद झोटा का शव उनके पैतृक स्थान ले जाया गया।
अंतिम संस्कार से पहले उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे। झोटा की 13 अक्टूबर को मनसा शहर के एक व्यस्त बाजार में स्थित दवा की दुकान पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशे की लत लगाने वाली दवाएं बेचे जाने को लेकर दुकान के मालिक का विरोध किया था।
इसके बाद दुकान के मालिक ने उन पर गोली चला दी थी। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के एक सदस्य ने शनिवार को कहा था कि झोटा का अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक स्थान मनसा में किया जाएगा।
जेएसी को परविंदर सिंह झोटा इंसाफ एक्शन कमेटी के नाम से भी जाना जाता है। यह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में गठित विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं का गठबंधन है। झोटा का अंतिम संस्कार मनसा में चकेरियां रोड स्थित उनके खेतों में किया जाएगा।
उनके पिता भीम सिंह ने शनिवार को पंजाब के युवाओं से मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ संकल्प लेने की अपील की। सिंह ने शनिवार को चंडीगढ़ में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम पहले शव को अपने घर ले जाएंगे और इसके बाद दोपहर झोटा का अंतिम संस्कार किया जाएगा।’’ झोटा का शव शुक्रवार तड़के मनसा के सिविल अस्पताल के शवगृह से चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर लाया गया था। इससे पहले उनके परिवार ने 22 दिन से जारी आंदोलन समाप्त कर दिया था और बुधवार को पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद पोस्टमार्टम कराने पर सहमति जताई थी।
झोटा के पिता ने शुक्रवार को कहा था कि वह मनसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव चौधरी का तत्काल तबादला करने की मांग को लेकर अनशन करेंगे। झोटा के परिवार के सदस्य और जेएसी उनके लिए न्याय की मांग करते हुए मनसा में धरने पर बैठे थे। प्रदर्शन के दौरान 28 अक्टूबर को जेएसी के दो सदस्यों लखवीर सिंह और मोहंजीत सिंह शेरों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
चार नवंबर को प्रदर्शनकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी। इसमें विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड़ियां भी शामिल थे। इसके बाद पांच नवंबर की शाम को जेएसी के सदस्यों को नाभा जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
झोटा की हत्या उस समय हुई थी, जब वह फेसबुक पर लाइव सत्र कर रहे थे। इस घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
झोटा की हत्या के बाद विपक्षी दलों ने मादक पदार्थों के मुद्दे और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर मान सरकार पर हमले तेज कर दिए थे। जेएसी मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग कर रही थी। पंजाब सरकार ने झोटा की मौत की जांच पहले ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी।
यह कदम उनके परिवार की मांग के बाद उठाया गया था। राज्य सरकार ने इस मामले में एक थाना प्रभारी, एक पुलिस उपाधीक्षक और एक औषधि निरीक्षक को निलंबित कर दिया था। परिवार ने झोटा के नाम पर एक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने और घटना में घायल हुए चारों लोगों को मुआवजा देने की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था।
इसके अलावा सरकार ने झोटा की प्रतिमा किसी पार्क या स्टेडियम में स्थापित करने की मांग भी मान ली थी।