Anurag Thakur और Pravesh Verma पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, समीक्षा याचिका खारिज

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 03, 2026

नयी दिल्ली, तीन अगस्त उच्चतम न्यायालय ने अपने उस निर्णय की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के कथित नफरती भाषणों से संज्ञेय अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता वृंदा करात और के.एम. तिवारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत के 29 अप्रैल के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘हमने पुनर्विचार याचिका और उसके समर्थन में दिए गए आधार का अवलोकन किया है।

माकपा नेताओं ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के जून 2022 के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने करात और तिवारी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए-विरोधी प्रदर्शन के दौरान ठाकुर और वर्मा के कथित नफरती भाषणों के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से निचली अदालत के इनकार करने को चुनौती दी गई थी। अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय ने उल्लेख किया कि उच्च न्यायालय ने स्वतंत्र रूप से पड़ताल करने के बाद यह माना था कि भाषणों से कोई भी संज्ञेय अपराध होने का पता नहीं चलता है।

साथ ही, शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी गौर किया था कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा भड़की या अव्यवस्था फैली। माकपा नेताओं ने दावा किया था कि 27 जनवरी 2020 को ठाकुर ने रिठाला में एक रैली में कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि 28 जनवरी 2020 को वर्मा ने कथित तौर पर भड़काऊ और नफरती भाषण दिए थे।

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