हमारे वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह का इस तरह से हमें छोड़कर जाना अत्यंत दुःखदःअनुराग ठाकुर

By विजयेन्दर शर्मा | Aug 22, 2021

धर्मशाला। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर जन आशीर्वाद यात्रा के तहत जिला कांगडा जिला के धर्मशाला पहुंचे तो पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह के निधन की खबर आ गई। जिससे माहौल गमगीन हो गया। शिमला से मंडी होते हुये यात्रा कांगडा पहुंची। 

इधर, भाजपा ने कल्याण सिंह के निधन पर अपने तीन दिन के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए आज राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी लखनऊ जा रहे हैं। यही वजह है कि हिमाचल में चल रही अनुराग ठाकुर की जन आर्शीवाद यात्रा पर भी अनिशिचतता मंडराने लगी है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि भजापा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह हमारे बीच नही रहे । उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, एक कुशल प्रशासक,पार्टी के वरिष्ठ नेता का इस तरह से हमें छोड़कर जाना अत्यंत दुःखद है, बाबूजी के जाने से जो राजनैतिक रिक्तता आई है उसकी भरपाई असंभव है। उन्होंने हिमाचल में अपने राज्यपाल के तौर पर कार्यकाल के दौरान बखूबी कार्य किया था। जिसे लोग आज भी याद करते हैं। ईश्वर उनके समर्थकों को ,परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति दे,बाबूजी की पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे यही प्रार्थना है।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष भाजपा सुरेश कश्यप, मंत्री राकेश पठानिया, सरवीण चौधरी, राज्यसभा सांसद इंदु गिस्वामी , महामंत्री त्रिलोक कपूर एवं संजीव कटवाल भी मौजूद रहे। 

भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक कल्याण सिंह का पार्टी के साथ ही भारतीय राजनीति में कद काफी विशाल था। अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। राम मंदिर आंदोलन के नायकों में से एक कल्याण सिंह का जन्म छह जनवरी, 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था। कल्याण सिंह ने दो बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला। अतरौली विधानसभा से जीतने के साथ ही वह बुलंदशहर तथा एटा से लोकसभा सदस्य भी रहे। वह राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे।

राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने के बाद कल्याण सिंह ने लखनऊ में आकर एक बार फिर से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

पहली बार 1991 में कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और दूसरी बार 1997 में। उनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही विवादित ढांचा विध्वंस की घटना घटी थी। अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छह दिसंबर, 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया।

कल्याण सिंह 1993 में अतरौली तथा कासगंज से विधायक निर्वाचित हुए। इन चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, लेकिन सरकार न बनने पर कल्याण सिंह विधानसभा में नेता विपक्ष के पद पर बैठे। इसके बाद भाजपा ने बसपा के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। तब कल्याण सिंह सितंबर 1997 से नवंबर 1999 में एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। गठबंधन की सरकार में मायावती पहले मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन जब भाजपा की बारी आई तो उन्होंने समर्थन वापस ले लिया।

बसपा ने 21 अक्टूबर, 1997 को कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। बसपा की चाल भांप चुके कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के संपर्क में थे और उन्होंने नरेश अग्रवाल के साथ आए विधायकों की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन कराया 21 विधायकों का समर्थन दिलाया। नरेश अग्रवाल को सरकार में शामिल करके उनको ऊर्जा विभाग का मंत्री भी बना दिया।

कल्याण सिंह ने किसी बात पर खिन्न होकर दिसंबर, 1999 में भाजपा छोड़ दी। उन्होंने अपनी पार्टी बना ली और मुलायम सिंह यादव के साथ भी जुड़ गए। करीब पांच वर्ष बाद जनवरी 2003 में उनकी भाजपा में वापसी हो गई। भाजपा ने 2004 लोकसभा चुनाव में उनको बुलंदशहर से प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव 2009 से पहले भाजपा को छोड़ दिया। वह एटा से 2009 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़े और जीत दर्ज की।

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