By नीरज कुमार दुबे | Nov 07, 2026
Apple के iPhone की एक गुप्त शब्द सूची 'Graylist' में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े राजनीतिक कटाक्ष शामिल होने का खुलासा हुआ है। करीब एक लाख शब्दों और वाक्यांशों वाली इस सूची में 'Modi braggart', 'Rahul is Pappu' और 'Dictator Trump' जैसे शब्द दर्ज बताए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, Apple का कीबोर्ड इन शब्दों को अपने ऑटो-करेक्ट और टाइपिंग सुझावों में रोकता है। इस खुलासे ने दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के डिजिटल सिस्टम में राजनीतिक शब्दों के चयन और नियंत्रण को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
हम आपको बता दें कि इस खुलासे ने दुनिया की राजनीति में टेक्नोलॉजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला केवल कुछ शब्दों को कीबोर्ड से हटाने या रोकने का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों के संवाद को प्रभावित करने वाली कंपनियां आखिर किन आधारों पर यह तय करती हैं कि कौन-से शब्द लोगों के सामने स्वतः आएंगे और कौन-से नहीं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, Apple की इस कथित Graylist में हिंदी भाषा के ऐसे वाक्यांश भी शामिल हैं, जो भारतीय राजनीति में इस्तेमाल होने वाले कटाक्षों से जुड़े हैं। इनमें 'Modi braggart' और 'Rahul is Pappu' जैसे वाक्यांश शामिल बताए गए हैं। यानी एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने वाला राजनीतिक कटाक्ष है, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी पर तंज कसने वाला वाक्य भी इस सूची में दर्ज है। इस खुलासे का भारतीय राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से खास महत्व है। नरेंद्र मोदी आज केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका, अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध और चीन जैसी महाशक्ति के साथ प्रतिस्पर्धा के बीच मोदी का नाम दुनिया की राजनीतिक चर्चाओं में लगातार बना रहता है। वहीं राहुल गांधी भारतीय विपक्ष का प्रमुख चेहरा हैं और उनकी राजनीतिक गतिविधियां भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बनाती रही हैं। ऐसे में भारतीय राजनीति से जुड़े इन दोनों प्रमुख चेहरों के नाम पर आधारित राजनीतिक कटाक्षों का Apple की कथित गुप्त सूची में होना इस मामले को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बनाता है।
इस सूची का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े 'Dictator Trump' और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए इस्तेमाल होने वाले 'Sleepy Joe' जैसे राजनीतिक वाक्यांश भी इसमें शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा 'Right Wing Conspiracy', 'Tibetan Independence' और 'United Ireland' जैसे राजनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व रखने वाले शब्दों पर भी प्रतिबंधात्मक फिल्टर लगाए जाने की बात सामने आई है। साथ ही फ्रेंच भाषा में 'Immigration too high' और हिब्रू भाषा में 'Occupied Territories' जैसे वाक्यांश भी इस सूची में बताए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह मामला किसी एक देश, एक राजनीतिक दल या एक नेता तक सीमित नहीं है। Apple के कीबोर्ड में अलग-अलग भाषाओं और देशों के राजनीतिक विमर्श से जुड़े शब्दों को लेकर एक व्यापक व्यवस्था मौजूद होने का दावा किया गया है।
इस पूरे मामले का खुलासा स्वतंत्र शोधकर्ता डेरिक कॉफमैन (Derik Kauffman) ने किया। सितंबर में उन्होंने देखा कि iPhone पर Swipe Typing करते समय कुछ सामान्य शब्द और वाक्यांश लिखने में कीबोर्ड असामान्य व्यवहार कर रहा था। इसके बाद उन्होंने तकनीकी जांच शुरू की। इस पड़ताल में OpenAI के Codex और Anthropic के Claude Code जैसे AI टूल्स की मदद ली गई। आखिरकार उन्हें Apple के ऑपरेटिंग सिस्टम के भीतर छिपी ऐसी सूची का पता चला, जिसमें करीब एक लाख शब्दों और उनके अलग-अलग रूपों को शामिल किए जाने का अनुमान है। साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी ने भी iPhone पर सूची में शामिल कुछ शब्दों का परीक्षण किया और पाया कि उन्हें Swipe Typing या Autocomplete के जरिए लिखना मुश्किल हो रहा था।
उधर, Apple ने इस रिपोर्ट में सामने आए प्रत्येक शब्द या सूची के आकार पर सीधे कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। कंपनी का कहना है कि उसका कीबोर्ड ऐसे सुझाव देने से बचने के लिए तैयार किया गया है, जो अनुचित या आपत्तिजनक हो सकते हैं। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपयोगकर्ता अपनी इच्छा से किसी भी शब्द को मैन्युअल रूप से टाइप कर सकते हैं और कीबोर्ड के सुझावों को बदल सकते हैं। इसका मतलब है कि यह शब्दों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि Autocomplete और Swipe Typing के माध्यम से मिलने वाले सुझावों को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था है। यहां सवाल यह है कि जब किसी टेक्नोलॉजी कंपनी के पास यह तय करने की क्षमता हो कि करोड़ों लोग अपने मोबाइल पर कौन-से शब्द आसानी से लिख सकेंगे, तो उसके फैसलों की जवाबदेही किसके प्रति होगी?
बहरहाल, दुनिया की राजनीति में जहां नेताओं के बयान, विरोधियों के आरोप और राजनीतिक कटाक्ष लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हैं, वहीं Apple की इस कथित Graylist ने डिजिटल दुनिया में अभिव्यक्ति और तकनीकी नियंत्रण की एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मोदी, राहुल और ट्रंप जैसे वैश्विक राजनीतिक चेहरों से जुड़े शब्दों का इस सूची में सामने आना इस पूरे खुलासे को और भी राजनीतिक तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व देता है।