फर्जी पासपोर्ट के चक्कर में 140 करोड़ परेशान? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कैसे ये साख का सवाल

By अभिनय आकाश | Jul 18, 2026

आज के दौर में जब भी हमसे कहीं पहचान मांगी जाती है, हम तुरंत जेब से आधार कार्ड निकाल देते हैं या विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट सामने रख देते हैं। लेकिन क्या कानूनन ये दस्तावेज आपकी भारतीय नागरिकता को पुख्ता करते हैं? इस गंभीर और पेचीदा सवाल पर वरिष्ठ अधिवक्ता और कानूनी विशेषज्ञ विराग गुप्ता ने एक ऐसा व्यावहारिक तर्क दिया है, जिसने देश के प्रशासनिक और राजनीतिक विमर्श को एक नया मोड़ दे दिया है। अपने विशेष कार्यक्रम 'नो फिल्टर विथ विराग गुप्ता' में उन्होंने जाने-माने अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

इसे भी पढ़ें: Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: नागरिकता का निर्धारण 'निष्पक्ष और उचित' प्रक्रिया से हो... असम में विदेशी घोषित 27 लोगों को बड़ी राहत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख का सवाल

विराग गुप्ता ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि भारत का पासपोर्ट विदेशों में हमारी नागरिकता का अकाट्य प्रमाण माना जाता है, लेकिन देश के भीतर ही कुछ कानूनी कुतर्कों के आधार पर इसे 'सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट' कहकर इसकी क्रेडिबिलिटी को संदिग्ध बना दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट रैंकिंग में भारत पहले से ही काफी पीछे है। ऐसे में अगर हम खुद अपने ही सरकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर बार-बार राजनीतिक या प्रशासनिक सवाल उठाएंगे, तो इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और पर्यटकों की साख खराब होती है और इमीग्रेशन जैसी जगहों पर उन्हें संदेह की नजर से देखा जा सकता है।

प्रमुख खबरें

सुबह कैमरा, रात में बंदूक... इजरायल ने UN में बवाल मचा दिया, ये देख भारत भी हैरान!

526KM रेंज वाली Kia Syros EV आ गई, Tata Nexon EV को मिलेगी सीधी टक्कर!

US-China Tension: अमेरिकी सांसदों ने SEC से की मांग, National Security के लिए चीनी कंपनियों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध

Tiger Lightning: बांग्लादेश में US Army और सशस्त्र बलों का सैन्य अभ्यास शुरू, आतंकवाद पर होगा प्रहार