By अभिनय आकाश | Jun 03, 2026
आज से ठीक चार बरस पहले जून के महीने में ही अंतराष्ट्रीय योग दिवस के दिन एकनाथ शिंदे का नाम पूरे दिन सुर्खियों में छाया रहा। शिंदे के कदम ने शिवसेना के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र के महाविकास अघाड़ी सत्तारूढ़ गठबंधन के सियासी भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया। एकनाथ शिंदे और 40 विधायकों की बगावत की वजह से उद्धव ठाकरे की कुर्सी से लेकर पार्टी तक चली गई। लेकिन अब राजनीतिक अटकलें तेज हैं और कहा जा रहा है कि शिवसेना क्या फिर से जुड़ने जा रही है? क्या उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंद एक बार फिर से एक ही पार्टी में दिखाई देंगे। महाराष्ट्र की राजनीति में यह सवाल अचानक इसलिए उठने लगा है क्योंकि दोनों खेमों के बड़े नेता अब खुलकर एकजुटता की बात करने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस बीजेपी के साथ रिश्तों को लेकर शिवसेना में टूट हुई थी, आज उसी बीजेपी को दोनों तरफ के कुछ नेता सबसे बड़ा खतरा बता रहे हैं।
पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह, संगठन और राजनीतिक विरासत हर चीज के लिए टकराव और संघर्ष हुआ। ऐसे में आज अगर दोनों तरफ के नेता यूनिटी या एकता की बात कर रहे हैं तो ये अपने आप में बड़ी पॉलिटिकल मैसेजिंग मानी जा रही है। खासकर जब शिंद सेना के सीनियर नेता इस टाइमिंग को एकदम सही बताते हैं। अंबादास दानवे का साफ कहना है कि बीजेपी धीरे-धीरे अपने सहयोगी दलों को कमजोर कर रही है। दानवे कहते हैं बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। बीजेपी भी एनसीपी और शिवसेना के साथ यही कर रही है। यह उनका दावा है। आगे उन्होंने दावा किया बीजेपी का मकसद शिवसेना को खत्म करना है क्योंकि वह इस पार्टी को सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि अपना दुश्मन मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग कभी अविभाजित शिवसेना छोड़कर अलग हुए थे उन्हें अब शायद इस बात का एहसास हो रहा होगा।
उधर अब्दुल सत्तार जो शिंदे की शिवसेना के नेता हैं उन्होंने भी बीजेपी की ओर इशारा करते हुए कहा अगर हमारा बड़ा भाई ही हमें खत्म कर रहा है तो फिर एकता की बात करने में क्या गलत है? क्या हर्ज है? ध्यान दीजिए। यहां बड़ा भाई शब्द का प्रयोग किया गया। अंग्रेजी में इसे कहा जाता है बिग ब्रदर एटीट्यूड। यानी वो पक्ष जो ज्यादा मजबूत है और अपने करीबी छोटे पक्ष पर धस जमा रहा हो।