By अभिनय आकाश | Jun 30, 2026
नेतन्याहू कैबिनेट ने एक ऐसे फैसले को मंजूरी दे दी है जिसके बाद इजराइल और तुर्की में भयंकर बवाल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस प्रस्ताव में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऑटोमन साम्राज्य के समय अर्मेनियाई लोगों की हुई मौतों को आधिकारिक तौर पर नरसंहार माना गया है। हालांकि इस फैसले को अंतिम रूप देने के लिए अभी इजराइली संसद की मंजूरी बाकी है। यह मुद्दा नया नहीं है। 1915 के आसपास हुई घटनाओं को लेकर आज भी दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई है। अर्मेनिया और कई देशों का कहना है कि उस दौर में करीब 15 लाख अर्मेनियाई लोगों की व्यवस्थित तरीके से हत्या कर दी गई थी। कई इतिहासकार इसे 20वीं सदी का पहला नरसंहार मानते हैं। दूसरी ओर तुर्की लगातार इस दावे को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि उस समय प्रथम विश्व युद्ध और गृह संघर्ष चल रहा था और लोगों की मौतें युद्ध की परिस्थितियों में हुई थी। इसलिए इसे नरसंहार नहीं कहा जा सकता। इसी वजह से तुर्की लंबे समय से दूसरे देशों से भी अपील करता रहा है कि वे इन घटनाओं को नरसंहार के रूप में मान्यता ना दें।
इसी बीच एक और बड़ा सवाल उठ रहा है कि जिस इजराइल ने अब अरर्मेनिया नरसंहार को मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ाया है वही खुद गजा युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और तुर्की समेत कई देशों ने इजराइल पर गजा में नरसंहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। गजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए युद्ध में 73,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई गई है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी इजराइल पर गंभीर आरोप दोहराए हैं। हालांकि इजराइल इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है। उसका कहना है कि वह आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाता और हमास नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इजराइल का यह फैसला तुर्की के साथ उसके रिश्तों को और ज्यादा खराब करेगा?