By अनन्या मिश्रा | Apr 06, 2026
आजकल बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल का सीधा असर लोगों के शरीर पर पड़ रहा है। आज के समय में तेजी से वेट लॉस की समस्या बेहद आम होती जा रही है। ऐसे में आपको यह समझने की जरूरत है कि अचानक से वेट लॉस का कारण सिर्फ लाइफस्टाइल या डाइट नहीं हो सकता है। बल्कि यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का भी संकेत हो सकता है। शरीर का तेजी से वेट कम होना, कमजोरी, थकान और इम्यूनिटी में कमी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
बता दें कि थायरॉइड ग्रंथि बॉडी के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती है।
अगर थायरॉयड ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो, तो शरीर की कैलोरी बर्निंग दर तेजी से बढ़ने लगता है।
जिसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति का बिना एक्सरसाइज और डाइट के भी तेजी से वेट लॉस होने लगता है।
इस दौरान हाथ-पांव कांपना, दिल की धड़कन तेज होना, नींद न आना और थकान आदि जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
अनियंत्रित डायबिटीज में बॉडी ग्लूकोज को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है।
शरीर एनर्जी के लिए मांसपेशियों और फैट का इस्तेमाल करने लगता है, जिससे वेट कम होने लगता है।
इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, भूख में बदलाव, थकान और लगातार प्यास लगना आदि बदलाव शामिल हैं।
अगर सही समय पर इलाज न हो तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
पाचन तंत्र संबंधी समस्या जैसे अल्सरस, क्रॉनिक डाइजेशन डिसऑर्डर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन या इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पोषण अवशोषण को प्रभावित करते हैं।
इसका सीधा असर ऐसे होता है कि शरीर जितना खाता है, उतनी ही कैलोरी और न्यूट्रिएंट्स अवशोषित नहीं होते हैं।
जिसके परिणामस्वरूप पेट दर्द, वेट कम होना, दस्त या गैस जैसी समस्या हो सकती है।
लगातार मानसिक तनाव रहने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है।
तनाव के कारण हार्मोन कोर्टिसोल भूख को कम करता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ा देता है।
लंबे समय तक तनाव रहने से व्यक्ति का वेट तेजी से कम हो सकता है।
वहीं तनाव होने पर चिड़चिड़ापन, नींद न आना और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं होती हैं।
कुछ संक्रमण जैसे इंफ्लुएंजा, टीबी, वायरल फीवर या अन्य गंभीर संक्रमण शरीर की एनर्जी खपत बढ़ा देते हैं।
यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और वेट लॉस में भी योगदान देता है।
इसके अलावा कमजोरी, बुखार, पसीना और भूख कम होना जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।