By अनन्या मिश्रा | Jun 29, 2026
हर व्यक्ति के जीवन पर हर ग्रह का अलग-अलग प्रभाव होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो इससे भाग्य बाधित हो सकता है। वहीं नाखून से भी ग्रहों की स्थिति के बारे में जाना जा सकता है। लाल किताब के मुताबिक नाखून के प्रकार, आकार और रंग भी ग्रहों की स्थिति का संकेत देते हैं। अगर नाखून में हरापन है, तो यह बुध के कमजोर होने का संकेत हो सकता है।
अगर बुध ग्रह की स्थिति कमजोर हो, तो इसका प्रभाव हाथ के नाखूनों पर भी नजर आने लगता है। लाल किताब के अनुसार, ऐसे जातकों के हाथ की अंगुलियों के नाखून गोल होते हैं या नाखून में हल्का हरापन नजर आ सकता है।
ज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि और व्यापार का कारक माना जाता है। बुध के अशुभ होने पर जातक को शिक्षा में बाधा सामना करना पड़ सकता है। वहीं व्यापार में भी समस्याएं आती हैं। जोकि आर्थिक समस्या की वजह बनता है।
बुधवार को हरे रंग के कपड़े पहनना चाहिए और गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए। वहीं भगवान गणेश की पूजा करें और सुबह के समय घास पर नंगे पैर चलें। बुध के मंत्र 'ऊँ बुं बुधाय नम:' मंत्र का 108 बार जाप करें।
अगर कुंडली में राहु कमजोर स्थिति में हो, तो ऐसे व्यक्ति के नाखून चौड़े होते हैं। यह बिना किसी चोट के नीले रंग के नजर आते हैं। हाथ के नाखून झुके हुए, टेढ़े या सिक्के के रंग के नजर आएं, तो यह कमजोर राहु का संकेत होता है।
राहु कमजोर होने पर जातक के मन में हमेशा एक अजीब सा डर बना रहता है। कई बार अचानक भ्रम की स्थिति बनती है और इससे निर्णय में उलझन का सामना करना पड़ता है। इसका असर सेहत पर भी देखने को मिलता है। राहु के अशुभ प्रभाव से मांसपेशियों और ब्लड संबंधी समस्या हो सकती है।
उपाय के तौर पर नियमित रूप से 'ऊँ रां राहवे नम:' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। साथ ही भगवान शिव के मंदिर जाकर जलाभिषेक करना चाहिए।
यदि हाथ के नाखून छोटे-छोटे हैं और इनका रंग सफेद नजर आए, तो यह कमजोर शुक्र का संकेत होता है। इन जातकों को शुक्र के प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।
शुक्र ग्रह को सुखद दांपत्य जीवन, ऐश्वर्य, सौंदर्य और सुख-सुविधाओं में वृद्धि करने वाला ग्रह माना गया है। कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं जातक के सुखों में बाधा आती है और आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ सकता है।
शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चीनी, दही और दूध आदि का दान करना चाहिए। वहीं शुक्र के मंत्र 'ऊँ शुं शुक्राय नम:' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। वहीं संभव हो तो शुक्रवार को सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
अगर नाखून का साइज बहुत छोटा होता है और यह पीले रंग के हों तो यह कमजोर बृहस्पति का संकेत होता है। वहीं लंबे नाखून और सोने समान रंग के दिखने वाले नाखून भी कमजोर गुरु का संकेत होते हैं।
बृहस्पति को भाग्य, ज्ञान, धन और विवाह आदि का कारक माना जाता है। अगर कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो व्यक्ति को करियर में रुकावट और भाग्य में कमी का सामना करना पड़ता है। विवाह में बाधा और वैवाहिक जीवन में समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
बृहस्पति के दिन पीली वस्तुओं जैसे पीले वस्त्र, केला और चने की दाल आदि का दान करना चाहिए। वहीं अगर संभव हो तो गुरुवार को पीले रंग के कपड़े पहनें और नहाने के पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें।
अगर नाखून लंबे और ज्यादा तंग नजर आते हैं, तो यह कमजोर केतु का संकेत होता है। वहीं चितकबरे नाखून होना भी कमजोर केतु का संकेत होता है।
ज्योतिष में केतु को छाया ग्रह माना गया है। जिस भी भाव में केतु कमजोर स्थिति में होगा, यह उस भाव के शुभ फल को कम कर देता है। जिसके प्रभाव से भाग्य में कमी और निर्णय लेने में उलझन जैसी स्थिति बन सकती है। यह सेहत संबंधी और मानसिक भ्रम की समस्याओं की वजह बन सकता है।
भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें और उनको दूर्वा अर्पित करें। वहीं कुत्ते को रोटी खिलाना भी शुभ माना जाता है। वहीं केतु के मंत्र 'ऊँ कें केतवे नम:' का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति के हाथ के नाखून मीडियम साइज के हैं और उनमें कालापन दिख रहा है। तो यह शनि की प्रतिकूलता को दिखा सकता है। शनि देव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। वह व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।
शनि की स्थिति कमजोर पर से व्यक्ति के करियर में लगातार कोशिशों और मेहनत के बाद भी अनुकूल परिणाम नहीं मिलते हैं। इन लोगों के कार्यों में बाधाएं आती हैं और शनि के अशुभ प्रभाव की वजह से जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ता है।
शनिवार के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, काला छाता और काले तिल आदि का दान करना चाहिए। वहीं शनिदेव के मंदिर में जाकर सरसों का तेल अर्पित कर 'ऊँ शं शनैश्चराय नम:' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए