By अभिनय आकाश | Sep 04, 2021
तकनीक के क्षेत्र में दुनिया काफी तरक्की कर रही है। इसी तरक्की के साथ हथियारों की रेस में भी अलग-अलग प्रयोग हो रहे हैं। इन्हीं प्रयोगों से निकला सबसे घातक हथियार ड्रोन है। ड्रोन की मदद से ही अमेरिका और उसके मित्र देशों ने अलकायदा और आईएसआईएस को भारी नुकसान पहुंचाया। ड्रोन की ताकत सब समझते हैं लेकिन अगला दौर स्वार्म ड्रोन का है। यानी ड्रोन हमलावरों की ऐसी फौज जिससे बच पाना नामुमकिन है। अभी तक अमेरिका, चीन, इजरायल जैसे देश इस तकनीक पर काम कर चुके हैं और कामयाब रहे हैं। क्योंकि ये नई जंग है और सबसे आधुनिक हथियाक है। इस रेस में अब भारत भी शामिल हो रहा है। भारतीय सेना ने अभी-अभी बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप न्यूज़स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज को 100 स्वॉर्म ड्रोन की आपूर्ति के लिए $ 15 मिलियन का अनुबंध दिया है। पिछले साल लद्दाख में भारत-चीन गतिरोध शुरू होने के बाद से सक्रिय सेना ने आपातकालीन खरीद के तहत ये ऑर्डर दिया।
स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी क्या है?
ड्रोनों का झुंड या फिर कहे कि एक साथ मिलकर कई सारे ड्रोन जब एक मिशन को अंजाम देते हैं तो इसे ड्रोन स्वॉर्मिंग या स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी कहते हैं। इनमें एक मदर ड्रोन होती है। जिसके अंदर से कई सारे छोटे-छोटे ड्रोन निकलते हैं जो अलग-अलग ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होते हैं। अधिक संख्या ही वजह से दुश्मन की एंटी एयरक्राफ्ट गन या मिसाइलें भी इनके ऊपर बेअसर साबित होती है।
भारी तबाही मचा सकते हैं स्वार्म ड्रोन
स्वार्म ड्रोन दुश्मन के इलाके में भारी तबाही मचाने में सक्षम हैं। स्वदेशी, सटीक, खतरनाक स्वार्म हल्के वजन और अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस हैं। स्वार्म ड्रोन दुश्मन के इलाके में सक्रिय एयर डिफेंस सिस्टम और रडार को भी धोखा देने में सक्षम होते हैं। ये ड्रोन दुश्मन के सामरिक ठिकानों पर सुसाइड हमला करने की ताकत रखते हैं। इन ड्रोन को ALFA-S (Air Launched Flexible Asset या Swarm) के नाम से भी जाना जाता है।
सेना दिवस परेड में 75 सशस्त्र ड्रोनों ने उड़ान भरी थी
रतीय सेना के सेना दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित करियप्पा परेड ग्राउंड में परेड का आयोजन किया गया था। इस दौरान सेना की विभिन्न रेजीमेंट्स ने शक्ति प्रदर्शन कर देश को सुरक्षा का एहसास भी कराया। परेड 2021 में कॉम्बैट स्वार्म ड्रोन का प्रदर्शन किया था। सेना दिवस की परेड में 75 सशस्त्र ड्रोनों ने उड़ान भरी थी।