By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 02, 2024
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अनुच्छेद 21 संविधान की आत्मा है और एक नागरिक की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय के इससे संबंधित मामलों पर शीघ्रता से फैसला नहीं करने से व्यक्ति इस बहुमूल्य अधिकार से वंचित हो जाएगा। न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी यह देखने के बाद की कि बंबई उच्च न्यायालय ने 29 जनवरी को शीर्ष अदालत के आदेश के बाद महाराष्ट्र में एक पार्षद की हत्या के मुख्य आरोपी अमोल विट्ठल वाहिले को जमानत दे दी है।
किसी नागरिक की स्वतंत्रता से संबंधित मामले पर शीघ्रता से निर्णय न लेना और मामले को किसी न किसी पर टाल देने से व्यक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीशुदा बहुमूल्य अधिकार से वंचित हो जाएगा।” पीठ ने कहा कि उसे बंबई उच्च न्यायालय में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं जिनमें जमानत और अग्रिम जमानत आवेदनों पर शीघ्रता से फैसला नहीं किया जा रहा है। पीठ ने ऐसे ही एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में अग्रिम जमानत की अर्जी पर चार वर्ष से अधिक समय तक फैसला नहीं किया गया।