अरुण नेहरू: जिन्हे इंदिरा गांधी राजनीति में लाईं, राजीव से मतभेद के बाद छोड़ दी थी कांग्रेस

By अंकित सिंह | Apr 23, 2022

भारत की राजनीति में गांधी नेहरू परिवार का दबदबा रहा है। गांधी-नेहरू परिवार का एक और सदस्य जिसका राजनीति में वर्चस्व देखने को मिला था, वह अरुण नेहरू थे। अरुण नेहरू गांधी-नेहरू परिवार के बेहद करीबी सदस्य थे। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में उन्हें देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक हस्तियों में शामिल किया जाता था। इसी से अरुण नेहरू के राजनीतिक कद का अंदाजा भी लगाया जा सकता है। अरुण नेहरू पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले नेताओं में से थे। उनके फैसले कांग्रेस और उसकी सरकार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होते थे। अरुण नेहरू का जन्म 24 अप्रैल 1944 को लखनऊ में हुआ था। उनके पिता का नाम आनंद नेहरू था। उन्होंने लखनऊ के ही ला मार्टिनियर बॉयज़ कॉलेज, लखनऊ और लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की ।अरुण नेहरू की शादी 1967 में सुभद्रा से हुई थी।

इंदिरा गांधी के चचेरे भाई होने के कारण उनके पक्ष में फैसला गया। रायबरेली की सीट गांधी परिवार के लिए प्रतिष्ठा की सीट थी। ऐसे में अरुण नेहरू का नाम इस सीट से फाइनल हो गया। अरुण नेहरू ने यहां से जीत हासिल की। संजय गांधी के निधन के बाद इनका कद कांग्रेस में काफी बढ़ने लगा। व्यापारिक समुदाय में अरुण नेहरू की अच्छी पकड़ थी। पार्टी के लिए फंड जुटाने में उनकी भूमिका भी अहम हो जाती थी। 1981 में जब राजीव गांधी राजनीति में आएं तो अरुण नेहरू उनके प्रमुख सलाहकार बने। इंदिरा गांधी के रहते पीएम हाउस में अरुण नेहरू की तूती बोलती थी। जब तक इंदिरा गांधी रहीं, अरुण नेहरू उनके काफी भरोसेमंद रहे। उन्होंने रायबरेली से 1984 में भी चुनाव जीता।

इसे भी पढ़ें: बाबू जगजीवन राम की 144वीं जयंती, दलित वर्ग के मसीहा के रूप में किया जाता है याद

कहते हैं कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह अरुण नेहरू ही थे जिन्होंने राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा था। राजीव गांधी की सरकार में अरुण नेहरू आंतरिक सुरक्षा मंत्री भी बने। इसके अलावा उन्हें ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि इसी दौरान राजीव गांधी से उनके कई मतभेद हुए जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और वीपी सिंह के साथ हो गए। वीपी सिंह ने उन्हें बिल्लौर से प्रत्याशी बनाया। बिल्हौर से वे चुनाव जीतने में कामयाब हुए। हालांकि धीरे-धीरे उनका कद घटने लगा। 1998-99 में अरुण नेहरू को भाजपा ने रायबरेली से उम्मीदवार बनाया। लेकिन वे चुनाव हार गए। अरुण नेहरू को भाजपा नेता अरुण जेटली का भी बेहद करीबी बताया जाता है। 25 जुलाई 2013 को अरुण नेहरू का गुड़गांव में निधन हो गया था।

- अंकित सिंह

प्रमुख खबरें

आज रात एक पूरी सभ्यता का हो जाएगा अंत, ट्रंप अब ईरान में वही करेंगे जिसका पूरी दुनिया को था डर?

Assam में सरकार बनते ही पहली Cabinet में UCC, Amit Shah बोले- चार शादी अब नहीं चलेगी

Mumbai vs Rajasthan: गुवाहाटी में हाई-वोल्टेज टक्कर, Points Table में टॉप पर पहुंचने की जंग।

Global Market में Maruti eVitara का दमदार प्रदर्शन, ANCAP क्रैश टेस्ट में मिली 4-Star रेटिंग