Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग, जानें सही तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

By दिव्यांशी भदौरिया | Jul 11, 2026

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ के महीने में आने वाली अमावस्या बेहद ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसको आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पितरों के तर्पण व पु्ण्य कर्मों के लिए शुभ माने जाते हैं। 

धार्मिक शास्त्रों में यह माना गया है कि आने वाली अमावस्या का पुण्यफल कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ से हनुमान जी की भी विशेष कृपा मिलती हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं आषाढ़ माह की अमावस्या कब है।

आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है ?

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6:50 बजे आरंभ होगी। यह तिथि 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3:14 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत एवं पर्व उदया तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए आषाढ़ी अमावस्या का पर्व 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

आषाढ़ अमावस्या 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

 - स्नान-दान का शुभ मुहूर्त- सुबह 4.30 बजे से 10.43 बजे तक।

 - सूर्योदय- सुबह 5.32 बजे।

 - स्नान-दान का उत्तम समय: सुबह 4:30 बजे से 10:43 बजे तक

 - लाभ चौघड़िया- सुबह 10.43 बजे से दोपहर 12.27 बजे तक

 - अमृत चौघड़िया- दोपहर 12.27 बजे से 2.10 बजे तक

 - पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म: दोपहर के समय करना शुभ माना गया है।

आषाढ़ अमावस्या के दिन क्या करें?

 - आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी या घर में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा पितरों का स्मरण करें।

 - अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही जरुरतमंदों को दान करें। ऐसा करने से आपको पुण्य फल की प्राप्ति होगी।

 - इसके बाद पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों के तेल या घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

- हनुमान चालीसा या "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।

 - पितरों की शांति के लिए तर्पण एवं जरुरतमंदों को भोजन कराएं।

 - पूरे दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें।

 - मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूर करें।

पितृ दोष निवारण मंत्र

ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।

गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्र

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।

नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।

पितृ स्तोत्रं पाठ 

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।

सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥

मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।

तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ॥

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।

द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।

अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि: ॥

प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।

योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।

स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ॥

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।

अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ॥

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।

जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ॥

तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।

नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज: ॥

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