By दिव्यांशी भदौरिया | Oct 07, 2026
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल को शिव पूजा के लिए काफी खास माना जाता है।
कब है अक्तूबर का प्रदोष व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्तूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से आरंभ होगी और इसका समापन 8 अक्तूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर होगा। प्रदोष काल 8 अक्तूबर को पड़ रहा है, इसलिए इस ही दिन व्रत रखा जाएगा। इस बार प्रदोष व्रत गुरुवार 8 अक्तूबर को रखा जाएगा।
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त
भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल में शाम 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहने वाला है। इस अवधि में भक्तजन शिवजी का पूजन, अभिषेक और आरती कर सकते हैं।
प्रदोष व्रत में ऐसे करें शिवजी की पूजा
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प जरुर लें। इसके बाद शिवलिंग का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, घी और शहद का प्रयोग किया जा सकता है।
अभिषेक करने के बाद भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र अर्पित करें। जिसके बाद धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, दीप, चंदन और अक्षत आदि पूजा सामग्री जरुर अर्पित करें। महादेव को शक्कर और घी से तैयार मिठाई का भोग लगाएं।
शाम के समय करें पूजा
इस व्रत में शाम की पूजा का खास महत्व माना जाता है। प्रदोष काल से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव मंदिर या घर के पूजा स्थल पर भगवान शिव की पूजा करें। इस दौरान शिव मंत्रों का जाप और शिव चालीशा का पाठ करें। फिर प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें और घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें। व्रत के समय मन को शांत रखे और भगवान शिव का स्मरण जरुर करें।