By अभिनय आकाश | Jun 30, 2026
भारतीय मूल के अमेरिकी कांग्रेस सदस्य (सांसद) रो खन्ना ने भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। वॉशिंगटन में आयोजित 'यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट' को संबोधित करते हुए कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद खन्ना ने दावा किया कि पिछले 30 वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इस बात से इनकार नहीं करेंगे। रो खन्ना ने इस कूटनीतिक गिरावट के लिए पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। अपने संबोधन में उन्होंने बेहद बेबाकी से बात रखते हुए कहा कि मैं अपनी बात को घुमा-फिराकर कहने वालों में से नहीं हूँ। जो सच है, उसे सीधे तौर पर सामने रखना मेरी आदत है। हकीकत यही है कि भारत और अमेरिका के संबंध इस समय पिछले तीन दशकों के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुँच चुके हैं। खन्ना ने विशेष रूप से ईरान के साथ बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना बेहद विनाशकारी साबित हुआ है। इसका सीधा और बुरा असर भारत में ईंधन (गैस और तेल) की कीमतों पर पड़ा है। उन्होंने मंच से कहा कि अगर किसी को मेरी बात पर यकीन न हो, तो वे सीधे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस बारे में बात कर सकते हैं।
उन्होंने ईरान और क्यूबा को धमकाने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौर में अमेरिका की विदेश नीति जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली हो गई है। खन्ना ने कहा कि अब हमारे सामने एक ऐसा अमेरिका है जो अपनी नैतिक सोच भूल चुका है, जिसकी विदेश नीति 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली है - जो ईरान और क्यूबा को धमका रहा है, ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी दे रहा है - और हम ऐसे डिनर कर रहे थे मानो सब कुछ सामान्य हो। जब यह राष्ट्रपति सचमुच पूरी दुनिया में अमेरिका की लीडरशिप को खत्म कर रहा है, तो भला कौन इस या उस तरह की पार्टनरशिप की परवाह करता है? खन्ना ने आगे कहा कि इमिग्रेंट्स (प्रवासियों) को लेकर भड़काऊ बातें करना, इस राष्ट्रपति का भड़काऊ रवैया और अमेरिका आने वाले इमिग्रेंट्स की कमी की बात करना हम चुप कैसे बैठ सकते हैं और उनकी उन नीतियों की निंदा कैसे न करें जो उन्होंने स्टूडेंट वीज़ा को लेकर अपनाई हैं, या अमेरिका आने वाले टैलेंट को जिस तरह से गलत दिखाया गया है?
डेमोक्रेटिक नेता ने कहा कि ट्रंप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका के आगे रहने की बात तो करते हैं, लेकिन टॉप AI रिसर्चर्स में से 38 प्रतिशत चीनी मूल के हैं। खन्ना ने कहा, "टॉप AI रिसर्चर्स में से 38 प्रतिशत चीनी मूल के हैं। 72 प्रतिशत के पास विदेशी डिग्रियां हैं। यह ऐसे राष्ट्रपति हैं जो यह नहीं समझते कि हमें टैलेंट को भर्ती करने की ज़रूरत है, न कि उन्हें दूर भगाने की।