By नीरज कुमार दुबे | Oct 29, 2026
असम में बाल विवाह के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिग बच्चियों का विवाह कराने, उसमें सहयोग देने और उनकी जिंदगी के फैसले उनके बचपन में ही तय कर देने वालों को अब कानून का सामना करना पड़ेगा। राज्यव्यापी अभियान के तहत 565 लोगों की गिरफ्तारी और 481 मामले दर्ज होना इस कार्रवाई का बड़ा संकेत है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि जब तक असम से बाल विवाह की प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। हम आपको बता दें कि राज्य सरकार की इस कार्रवाई का केंद्र केवल बाल विवाह करने वाले पुरुष ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी बनाया जा रहा है जो परिवार, रिश्तेदार या अन्य सहयोगी की भूमिका में इस गैरकानूनी प्रथा को अंजाम देने में मदद करते हैं।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अभी कुछ और आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल कुछ लोगों को गिरफ्तार करके अभियान की औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि बाल विवाह की प्रथा को जड़ से समाप्त करना है। उन्होंने बेटियों के भविष्य को लेकर कहा कि किसी को भी उनकी आकांक्षाओं और सपनों को बेड़ियों में जकड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। देखा जाये तो यह संदेश उन लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी है जो नाबालिग बच्चियों की उम्र, शिक्षा, स्वतंत्रता और भविष्य की अनदेखी करते हुए कम उम्र में विवाह को सामाजिक परंपरा का नाम देकर आगे बढ़ाते हैं।
हम आपको बता दें कि बाल विवाह के खिलाफ अभियान के तहत श्रीभूमि जिले में पुलिस ने 26 अक्टूबर की रात विशेष अभियान चलाकर 28 मामले दर्ज किए और 32 लोगों को गिरफ्तार किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रणब ज्योति कलिता के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में 28 ऐसे आरोपी शामिल हैं जिन पर बाल विवाह में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप है, जबकि चार अन्य पर विवाह कराने या उसमें सहायता देने का आरोप है। सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने अलग-अलग मामलों की जरूरत के अनुसार आरोपियों की हिरासत भी मांगी। कुछ मामलों में पुलिस रिमांड की अनुमति दी गई, जबकि अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह कार्रवाई इस बात को रेखांकित करती है कि प्रशासन अब केवल बाल विवाह कराने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उस पूरे तंत्र की जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है जो ऐसी शादियों को संभव बनाता है। साथ ही असम के धुबरी जिले में अभियान के दौरान सबसे अधिक गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। जिले के नौ थाना क्षेत्रों से 63 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें बाल विवाह में कथित रूप से शामिल लोग और ऐसे मामलों में भूमिका निभाने वाले माता-पिता तथा अभिभावक भी शामिल हैं।
पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, धुबरी सदर थाना क्षेत्र से 18, गौरिपुर से आठ, गोलकगंज से 15, अगोमोनी से एक, तमरहाट से दो, बिलासीपाड़ा से नौ, चापर से पांच और फकीरगंज से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अभियान का दायरा अलग-अलग इलाकों तक फैला हुआ है। प्रशासन का जोर उन लोगों की पहचान करने पर भी है जो नाबालिग बच्चियों के विवाह की व्यवस्था करने या उसे सामाजिक और पारिवारिक सहमति दिलाने में भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, नगांव जिले में भी पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए 43 लोगों को गिरफ्तार किया और 36 मामले दर्ज किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में 22 ऐसे पति शामिल हैं जिन पर नाबालिग लड़कियों से विवाह करने का आरोप है। बाकी 21 लोगों पर कथित तौर पर इन विवाहों में मदद करने का आरोप है। इनमें परिवार के वे सदस्य भी शामिल हैं जिन्होंने विवाह कराने में सहयोग किया। जिले में ढिंग थाना क्षेत्र से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें चार पति और चार कथित सहयोगी शामिल हैं। नगांव थाना क्षेत्र से सात गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें छह पति और एक कथित सहयोगी बताया गया है।
हम आपको बता दें कि अधिकांश मामलों में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़ित बच्चियों की काउंसलिंग कराई गई है और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार उनकी चिकित्सकीय जांच भी की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई गई है।
हम आपको याद दिला दें कि हिमंत बिस्व सरमा सरकार ने इससे पहले भी असम में बाल विवाह के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था। उस दौरान बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई थीं और बाल विवाह के मामलों में कथित रूप से शामिल पतियों, परिवार के सदस्यों तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। राज्य में मुस्लिम आबादी वाले कई इलाकों से ऐसे मामले सामने आए थे, जहां नाबालिग लड़कियों से विवाह करने के आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की।
इस पृष्ठभूमि में मौजूदा अभियान को सरकार की उसी नीति की निरंतरता के तौर पर देखा जा सकता है, जिसमें बाल विवाह को सामाजिक परंपरा या पारिवारिक सहमति की आड़ में स्वीकार करने से इंकार किया गया है। खासकर उन मामलों में, जहां कम उम्र की बच्चियों से विवाह करने के आरोप सामने आए, पुलिस कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि किसी भी समुदाय में होने के बावजूद नाबालिगों के अधिकारों का उल्लंघन कानूनी कार्रवाई का विषय है।
हालांकि, गिरफ्तारियों की संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि बाल विवाह पूरी तरह समाप्त हो गया है। अभियान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि जांच और मुकदमों में कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है, दोष सिद्धि कितनी होती है और बच्चियों को शिक्षा, सुरक्षा तथा अपने भविष्य पर निर्णय लेने के अवसर कितने मिलते हैं।
उधर, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने भी बाल विवाह में शामिल लोगों की गिरफ्तारी को उचित कार्रवाई बताया है। उनका समर्थन इस बात का संकेत है कि बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सहमति बन सकती है। इस बीच, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्पष्ट किया है कि अभियान में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। सरकार की प्राथमिकता नाबालिग बच्चियों को कम उम्र में विवाह के दबाव से बचाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।
बहरहाल, असम में 565 गिरफ्तारियां और 481 मामले दर्ज होने के बाद अब निगाहें आगे की पुलिस कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ अदालतों में होने वाले मुकदमों पर रहेंगी। मुख्यमंत्री का संदेश साफ है कि बाल विवाह के नाम पर बच्चियों का भविष्य दांव पर लगाने वालों को कानून का सामना करना होगा। इस अभियान की सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि सख्त कार्रवाई के साथ-साथ असम में ऐसी शादियों को रोकने के लिए स्थायी सामाजिक बदलाव भी सुनिश्चित किया जाए।