By रेनू तिवारी | Mar 23, 2026
असम विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। हिमंत विश्व शर्मा सरकार में खेल और युवा कल्याण मंत्री नंदिता गरलोसा ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। गरलोसा ने यह कदम आसन्न असम विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से टिकट नहीं मिलने के बाद उठाया। कांग्रेस द्वारा जारी बयान के मुताबिक गरलोसा आसन्न असम विधानसभा चुनाव में दिमा हसाओ जिले के हाफलोंग जिले से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस ने पहले इस सीट से अपने राज्य इकाई के महासचिव निर्मल लंगथासा को मैदान में उतारा था। लेकिन उन्होंने ‘व्यापक जनहित’ में गरलोसा को पार्टी का टिकट देने पर सहमति जताई है।
पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि नंदिता गरलोसा कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। वह पिछले पांच वर्षों से दीमा हसाओ की आवाज रही हैं और उन्होंने हमेशा अपने विश्वासों तथा सिद्धांतों के लिए दृढ़ता से खड़ी रही हैं।’’ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य की खेल और युवा कल्याण मंत्री को भाजपा में इसकी कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि हिमंत विश्व शर्मा को केवल आदिवासियों की जमीनें बड़ी कंपनियों को बेचने में दिलचस्पी है।
गरलोसा निवर्तमान विधानसभा में हाफलोंग का प्रतिनिधित्व करती हैं। भाजपा ने इस बार इस सीट से रुपाली लांगथासा को अपना उम्मीदवार बनाया है। असम कांग्रेस की मीडिया टीम ने हाफलोंग में गरलोसा के पार्टी में शामिल होने की एक तस्वीर साझा की। तस्वीर में राज्य के खेल और युवा कल्याण मंत्री गरलोसा कांग्रेस नेता निर्मल लंगथासा और अन्य लोगों के साथ नजर आ रही हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को हाफलोंग स्थित गारलोसा के घर गए। हालांकि, शर्मा और गरलोसा ने बैठक के नतीजों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए नौ अप्रैल को मतदान होगा जबकि नतीजे चार मई को आएंगे।
कांग्रेस ने भाजपा और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि हिमंत विश्व शर्मा की सरकार केवल आदिवासियों की जमीनें बड़ी कंपनियों को बेचने में रुचि रखती है। पार्टी के अनुसार, जो नेता आदिवासियों के हितों की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें भाजपा दरकिनार कर रही है। नंदिता गरलोसा के दल बदलने से दीमा हसाओ जिले में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, जिससे हाफलोंग सीट पर अब मुकाबला बेहद कड़ा होने की उम्मीद है।