घर में Clutter हमेशा खराब नहीं होता, रोजमर्रा की जिंदगी को बनाता है आसान: Research

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 27, 2026

(जमाल अबराशी, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी) ऑकलैंड, 27 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) अगर हम घर को व्यवस्थित रखने के विशेषज्ञ मैरी कोंडो के विचारों पर चलें, तो साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर ही बेहतर घर है। हालांकि, अल्बर्ट आइंस्टीन शायद इस बात से सहमत नहीं होते। मशहूर भौतिक विज्ञानी को लेकर व्यापक रूप से प्रचलित एक कथन है, “अगर बिखरी हुई मेज अव्यवस्थित दिमाग की निशानी है, तो खाली मेज किस बात की निशानी है?” न्यूजीलैंड के 22 परिवारों के घरों का अध्ययन करने के बाद प्रकाशित मेरा नया शोध भी इस प्रचलित धारणा को चुनौती देता है कि बिखरा सामान एक ऐसी समस्या है, जिसे हर हाल में ठीक किया जाना चाहिए। सामान का बिखराव हमेशा खराब व्यवस्था का संकेत नहीं होता। यह परिवारों के रोजमर्रा के कामकाज में मदद कर सकता है और जिंदगी को थोड़ा आसान बना सकता है।

----- कब समेटना जरूरी है? ----- तो क्या हमें घर समेटना छोड़ देना चाहिए और बिखरे सामान को सहजता से स्वीकार कर लेना चाहिए? ऐसा भी नहीं है। पहले हुए शोधों में घर में बिखरे सामान को तनाव, शर्मिंदगी और परिवार के सदस्यों के बीच विवाद से जोड़ा गया है। इससे जरूरी चीजें ढूंढ़ना मुश्किल हो सकता है, किसी जगह का ठीक से इस्तेमाल नहीं हो पाता या किसी दूसरे व्यक्ति का काम बढ़ सकता है। हमारा अध्ययन इन समस्याओं से इनकार नहीं करता। इसके बजाय, यह बताता है कि किसी जगह को देखकर केवल यह तय कर लेना पर्याप्त नहीं है कि वह कितनी बिखरी हुई है। यह समझना भी जरूरी है कि उस बिखराव से वास्तव में कोई परेशानी हो रही है या नहीं। हमने पाया कि घरों में बिखरे सामान को संभालने के तीन प्रमुख तरीके अपनाए जाते हैं-चीजों को समेटकर रखना, उन्हें वैसे ही रहने देना या नजरों से छिपा देना। एक महिला ने बताया कि वह अपने साथी की गोल्फ बॉल और दूसरी चीजों को अलमारी के नीचे सरका देती थीं, ताकि वे कम दिखाई दें। एक अन्य महिला रोजाना लिए जाने वाले पोषक पूरक पदार्थ रसोई के काउंटर टॉप ही रखती थीं, न कि भंडार कक्ष में। इसकी वजह यह थी कि अगर वह उन्हें समेटकर रख देतीं, तो शायद उन्हें लेना भूल जातीं। इन फैसलों से एक ऐसी बात सामने आती है, जिस पर पहले के शोधों में अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। घर को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग लोगों की जरूरतों, दिनचर्या और अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। एक व्यक्ति को जो सामान बिखरा हुआ लगता है, वह किसी दूसरे के रोजमर्रा के जीवन के लिए जरूरी हो सकता है। हमारे अध्ययन से यह भी पता चलता है कि घर में साफ-सफाई और व्यवस्था शायद ही कभी स्थायी बनी रहती है। लोग जब किसी जगह का इस्तेमाल करते हैं, तो वहां सामान बिखरने लगता है। जरूरत पड़ने पर उसे समेट दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वह जगह फिर बिखर जाती है। हर समय सब कुछ व्यवस्थित रखने की कोशिश में उन व्यवस्थाओं को बार-बार बदलना पड़ सकता है, जो अपने आप में उपयोगी हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के बिखराव को बर्दाश्त किया जाना चाहिए। लेकिन जो घर देखने में पूरी तरह व्यवस्थित हो, यह जरूरी नहीं कि वही वहां रहने वाले लोगों के लिए सबसे बेहतर भी हो।

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