Australia की Kiama Library को 150 साल की देरी के बाद वापस मिली दुर्लभ किताब

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 30, 2026

ऑस्ट्रेलिया के एक सार्वजनिक पुस्तकालय को एक किताब लगभग 150 साल की देरी के बाद लौटाई गई है और पुस्तकालय के पास उस व्यक्ति का पता लगाने का कोई जरिया नहीं है, जिसने यह पुस्तक ली थी। पुस्तकालय अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। किआमा पुस्तकालय की प्रबंधक मिशेल हडसन ने बताया कि 1858 में प्रकाशित पुस्तक एंटीक्विटीज ऑफ एथेंस को पिछले हफ्ते समुद्र तटीय शहर किआमा के एक पुस्तकालय में किसी व्यक्ति ने लौटाया।

जिस व्यक्ति को यह किताब मिली थी, उसने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए एसोसिएटेड प्रेस के संदेश का तुरंत जवाब नहीं दिया। हडसन के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस किताब पर करीब 28,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 19,500 अमेरिकी डॉलर) का विलंब शुल्क बनता है। यह गणना किताब के अंदर छपे उस नियम के आधार पर की गई है, जिसमें 1872 में पुस्तकालय खुलने के समय प्रति सप्ताह तीन पेंस (ब्रिटिश मुद्रा) का शुल्क निर्धारित था।

हालांकि हडसन ने कहा कि उस आखिरी उधारकर्ता का पता लगाने का कोई जरिया नहीं है जिस पर यह बकाया (जुर्माना) था। 1870 के दशक की वह लाइब्रेरी जर्नल, जिसमें यह दर्ज होता था कि किसने कौन सी किताब कब उधार ली थी, वह खो चुका है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से हमारे पास एक कड़ी गायब है।

किताब में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे पता चल सके कि इसे आखिरी बार किसने लिया था। वर्ष 1870 के दशक के पुस्तकालय नियमों के अनुसार, कोई व्यक्ति दूसरी किताब तभी ले सकता था, जब वह पहले ली गई किताब लौटाकर बकाया जुर्माना चुका देता। हडसन ने कहा, शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने इसे कभी वापस नहीं किया।

अब इस किताब को पुस्तकालय के स्थानीय इतिहास संग्रह में प्रदर्शित किया जाएगा। हडसन ने कहा, हम इसे दोबारा जारी नहीं करेंगे। हम नहीं चाहते कि इस किताब की वापसी के लिए फिर से 150 साल इंतजार करना पड़े।

प्रमुख खबरें

Neeraj Chopra और भारतीय दल Commonwealth Games की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में पहुंचे

Rahul Gandhi के Lok Sabha भाषण के दौरान गैर-मौजूद रहे Charanjit Singh Channi

Delhi Police कॉजपा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं करेगी दंडात्मक कार्रवाई

Spain Illegal Migration: स्यूटा सीमा पर घुसे 1500 से अधिक लोग, प्रशासन बोला- Ceuta अब और बोझ सहने को तैयार नहीं