25 लाख दीयों से जगमग हुई अयोध्या, बना नया रिकॉर्ड, CM Yogi बोले- सनातन के मार्ग में जो रोड़े हैं, उनका...

By अंकित सिंह | Oct 30, 2024

भव्य दीपोत्सव के जहत अयोध्या आज पूरी तरह से जगमग है। दीपोत्सव समारोह के तहत अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 25 लाख दीये जलाए गए। इसके साथ ही लेजर और लाइट शो देखने को मिला है। साउंड-लाइट शो के ज़रिए रामलीला का वर्णन किया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 'आरती' की। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में पूजा की, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। 

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योगी ने कहा कि आज हमारे पास यह अवसर है उन सभी आत्माओं को स्मरण करने का जिनका पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित था। मैं इस अवसर पर उन सभी पूज्य संतों को नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि जो 3.5 लाख की संख्या में अपनी शहादत देकर एक ही तमन्ना के साथ इस धरा से अल्विदा हो गए कि अयोध्या में चाहें कुछ भी हो इस धरा पर राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए... उनका संकल्प पूरा हुआ। राम लला के विराजमान होने के बाद ये दीपोत्सव का पहला अवसर है। इससे पहले हम लोग बोलते थे और जो हमने कहा वो करके भी दिखाया।

योगी ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है और इस शुरुआत को अपने तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचना है। इसलिए 2047 तक जब देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा, तो काशी और मथुरा को भी अयोध्या की तरह चमकना चाहिए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने अपना वादा (राम मंदिर का निर्माण) पूरा किया है और अब अयोध्या को खुद को साबित करने की बारी है। याद रखिए, मां सीता की यह अग्निपरीक्षा बार-बार नहीं होनी चाहिए। हमें इससे बाहर आना होगा.. अयोध्या के लोगों को एक बार फिर (इसके लिए) आगे आना होगा। यही कारण है कि हम आज इस भव्य समारोह के लिए यहां हैं। 

मुख्यमंत्री ने सरकार के विकास एजेंडे में ‘‘बाधा बनने’’ के लिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि माफियाओं की तरह इन बाधाओं को भी समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या का परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सनातन धर्म की विरासत के विकास और उन्हें वैश्विक मंच पर ले जाने के दृष्टिकोण का हिस्सा था। उन्होंने कहा, ‘‘इस साल 22 जनवरी को, 500 साल के इंतजार के बाद, भगवान राम लला एक बार फिर अपने जन्मस्थान पर विराजमान हुए, जिससे दुनिया को यह संदेश मिला कि किसी को भी अपने रास्ते से कभी नहीं भटकना चाहिए क्योंकि यह दृष्टिकोण निश्चित रूप से सफलता की ओर ले जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि यह उन सभी आत्माओं को याद करने का क्षण है जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।  

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