By एकता | Jun 17, 2026
हममें से ज्यादातर लोग हेल्दी खाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार दो अच्छी चीजों का कॉम्बिनेशन भी शरीर के लिए सही नहीं होता। इसका सबसे कॉमन उदाहरण है बनाना शेक। ज्यादातर लोग इसे हेल्दी और न्यूट्रिशियस ड्रिंक मानकर पीते हैं, लेकिन आयुर्वेद में दूध और केले को एक साथ खाने की सलाह नहीं दी जाती।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया के मुताबिक, कुछ खाद्य पदार्थों का गलत कॉम्बिनेशन पाचन शक्ति को कमजोर कर सकता है। इससे शरीर में अधपचा भोजन जमा होने लगता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहा जाता है।
समय के साथ यह गैस, पेट फूलना, भारीपन, आलस और दूसरी डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ये चीजें खराब हैं। दिक्कत तब होती है जब इन्हें गलत तरीके से या गलत चीजों के साथ खाया जाता है।
1. पालक और पनीर, क्यों नहीं?
पनीर में मौजूद कैल्शियम, पालक से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। साथ ही आयुर्वेद दो भारी चीजों को एक साथ खाने को पाचन के लिए मुश्किल मानता है।
बेहतर विकल्प: पालक को दाल के साथ खाएं और पनीर को किसी दूसरे मील में शामिल करें।
2. शहद और गर्म पानी, क्यों नहीं?
आयुर्वेद में शहद को गर्म करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि गर्म शहद शरीर में आसानी से नहीं पचता।
बेहतर विकल्प: शहद को सामान्य तापमान या हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर लें।
3. रात में दही खाना, क्यों नहीं?
दही को भारी माना जाता है और यह कफ बढ़ा सकता है। रात में डाइजेशन धीमा होने के कारण इससे पेट फूलना, बलगम और सुस्ती जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
बेहतर विकल्प: दही दिन में खाएं या छाछ का सेवन करें।
4. दूध और नमक, क्यों नहीं?
आयुर्वेद के अनुसार दूध और नमकीन चीजों के गुण एक-दूसरे से अलग होते हैं। इन्हें साथ लेने से पाचन प्रभावित हो सकता है।
बेहतर विकल्प: दूध को अकेले पिएं। चाहें तो इसमें खजूर, केसर, इलायची या हल्दी मिला सकते हैं।
5. खाना खाने के तुरंत बाद चाय, क्यों नहीं?
चाय में मौजूद टैनिन, खाने से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। इससे डाइजेशन भी प्रभावित हो सकता है।
बेहतर विकल्प: खाने के कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे बाद चाय पिएं।
6. खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत ठंडा पानी, क्यों नहीं?
बहुत ठंडे पेय पदार्थ पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं, जिससे गैस और भारीपन महसूस हो सकता है।
बेहतर विकल्प: खाने के साथ सामान्य तापमान का या हल्का गुनगुना पानी पिएं।
7. बराबर मात्रा में घी और शहद, क्यों नहीं?
आयुर्वेद में घी और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर खाना उचित नहीं माना गया है।
बेहतर विकल्प: दोनों का अलग-अलग सेवन करें या बराबर मात्रा में लेने से बचें।
8. अंडे और चाय, क्यों नहीं?
प्रोटीन से भरपूर भोजन के तुरंत बाद चाय पीने से पोषक तत्वों के अवशोषण पर असर पड़ सकता है और पेट भारी लग सकता है।
बेहतर विकल्प: अंडा खाने के 30 से 60 मिनट बाद चाय पिएं।
9. दूध और केला, क्यों नहीं?
आयुर्वेद में दूध और केले को विरुद्ध आहार माना गया है। दोनों ही भारी खाद्य पदार्थ हैं और इन्हें पचाने का तरीका अलग माना जाता है। साथ खाने पर डाइजेशन धीमा हो सकता है।
बेहतर विकल्प: केले को स्नैक की तरह अलग खाएं। दूध पीना हो तो 1-2 घंटे का गैप रखें।
10. मछली और दूध, क्यों नहीं?
आयुर्वेद में मछली और दूध का मेल सबसे चर्चित विरुद्ध आहार में गिना जाता है। माना जाता है कि दोनों की तासीर अलग होती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
बेहतर विकल्प: मछली और दूध का सेवन अलग-अलग समय पर करें और इनके बीच कम से कम 3-4 घंटे का अंतर रखें।
आयुर्वेद के ये सुझाव पारंपरिक मान्यताओं और पाचन से जुड़े सिद्धांतों पर आधारित हैं। हर व्यक्ति का शरीर और डाइजेशन अलग होता है। इसलिए किसी फूड कॉम्बिनेशन से अगर आपको कोई परेशानी नहीं होती, तो जरूरी नहीं कि वही असर हर किसी पर हो। सबसे जरूरी है कि आप अपने शरीर के संकेतों को समझें, संतुलित आहार लें और ऐसी डाइट अपनाएं जो आपके शरीर को सूट करे।