Prabhasakshi NewsRoom: Baba Ramdev के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर मचा घमासान, Salman Khurshid ने याद दिलाया संविधान

By नीरज कुमार दुबे | Jul 13, 2026

दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव के हिंदू राष्ट्र संबंधी बयान पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है। बाबा रामदेव ने कहा कि देश में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से किसी भी समुदाय को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों और ईसाइयों के लिए भारत में किसी प्रकार का खतरा नहीं है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संविधान की सर्वोच्चता और सभी धर्मों के लिए समान अधिकारों पर जोर दिया।

इसे भी पढ़ें: भ्रष्टाचार के मुद्दों पर कांग्रेस का पीएम मोदी पर निशाना, लगाया ‘खाऊंगा, खाने दूंगा और खिलाऊंगा’ का आरोप

बाबा रामदेव ने कहा कि कुछ लोग यह सवाल उठाते हैं कि यदि हिंदू राष्ट्र बना तो मुसलमान कहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति दाढ़ी रखे या न रखे, किसी भी प्रकार की टोपी, पगड़ी या वस्त्र धारण करे, यह उसकी पसंद हो सकती है, लेकिन उसका चरित्र अपने पूर्वजों जैसा होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं है और सभी समुदाय यहां सुरक्षित हैं।

बाबा रामदेव के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों, आस्थाओं और विचारों के लोगों को समान स्थान और अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान के मूल सिद्धांतों के साथ खड़ी है, जो विविधता में एकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग एक ही धार्मिक परंपरा का पालन करते, जैसा कि सुझाव दिया जा रहा है, तो समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत उसका संविधान है, जिसे सभी नागरिकों ने मिलकर स्वीकार किया है और उसी के आधार पर देश आगे बढ़ रहा है।

इस मुद्दे पर शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी से नहीं डरते और उनका विश्वास केवल अल्लाह पर है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के लिए खतरे जैसी बातें बिना किसी ठोस आधार के कही जा रही हैं और इससे लोगों का ध्यान वास्तविक सामाजिक तथा जनसरोकार के मुद्दों से भटकाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल की कुछ घटनाओं के कारण अयोध्या ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित हुआ है और ऐसे समय में समाज को बांटने वाले विवादों की बजाय वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना अधिक आवश्यक है।

बहरहाल, बाबा रामदेव के बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं के बाद एक बार फिर हिंदू राष्ट्र, संविधान और देश की बहुलतावादी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर बाबा रामदेव सभी समुदायों के साझा पूर्वजों और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को भयमुक्त बताने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कुछ धार्मिक प्रतिनिधि संविधान की सर्वोच्चता, समान अधिकारों और विविधता में एकता के सिद्धांत को देश की मूल पहचान बताते हुए किसी भी प्रकार के विभाजनकारी विमर्श से बचने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

प्रमुख खबरें

विरासत के अध्ययन के लिए भारत अब किसी की अनुमति का मोहताज नहीं: Nirmala Sitharaman

Womens Asia Cup: भारतीय महिला टीम ने Pakistan को 7 विकेट से हराया

Bihar Flood: गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पार, 11 जिलों में 16 लाख लोग बेहाल

UP में बाढ़ का असर घटा, अब केवल 14 जिले प्रभावित: CM Yogi Adityanath