बाबू जगजीवन राम की 144वीं जयंती, दलित वर्ग के मसीहा के रूप में किया जाता है याद

By निधि अविनाश | Apr 05, 2022

भारत की आजादी के बाद राजनीति में बहुत ही कम नेता ऐसे रहे जिन्होंने न केवल मंत्री बल्कि कई मंत्रालयों की चुनौती को स्वीकार किया और उसे अंतिम अंजाम तक भी पहुंचाया। भारतीय राजनिति शिखर के पुरुष रहे जगजीवन राम को मंत्री के रूप में जो विभाग मिला उन्होंने अपनी ईमानदारी से उसका संचालन किया। जगजीवन राम जो ठान लेते थे उसे पूरा करके ही छोड़ते थे। वह हर एक चुनौतियों का डटकर सामना करते थे और अन्याय के खिलाफ कभी भी समझौता नहीं किया। दलितों के सम्मान के लिए जगजीवन राम हमेशा संघर्षरत रहे। बाबू जगजीवन राम एक दलित परिवार से आते थे। उनका जन्म  5 अप्रैल, 1908 को बिहार में भोजपुर के चंदवा गांव में हुआ था। जन्म से ही उन्हें बाबूजी के नाम से संबोधित किया जाने लगा। जगजीवन के पिता शोभा राम एक किसान थे और ब्रिटिश सेना में नौकरी करते थे। अपनी पढ़ाई के लिए वह कोलकाता चले गए और वहां से उन्होंने 1913 में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उनकी मुलाकात नेताजी सुभाष चंद्र बोस से भी हुई। महात्मा गांधी के नेतृत्व में जगजीवन राम ने आजादी की लड़ाई में भी जमकर भूमिका निभाई। इन कारणों से बापू के वह सबसे खास पात्र भी बने और राजनीति के केंद्र में आए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में जगजीवन राम ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई और इसी वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। 

- निधि अविनाश

प्रमुख खबरें

Privacy पर छिड़ी बहस के बीच Meta का बड़ा एक्शन, AI Glasses में छेड़छाड़ पर बंद होगा Camera

Wimbledon में भारतीय टेनिस का नया सितारा, Arnav Paparkar 36 साल बाद Junior Quarter-Final में।

FIFA World Cup में रेफरी पर बड़ा बवाल, Argentina से हार के बाद मिस्र ने FIFA में दर्ज कराई शिकायत

Hormuz में हमलों से Crude Oil में लगी आग, US-Iran तनाव से भारत की भी बढ़ी टेंशन।