By अभिनय आकाश | Dec 11, 2025
बांग्लादेश की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और बेहद अहम खबर सामने आ रही है। चुनाव की घोषणा से ठीक पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को एक बड़ी राहत मिली है। हालांकि पार्टी पर पूरी तरह से बैन नहीं हटाया गया है। लेकिन सरकार के एक फैसले ने बांग्लादेश के आगामी चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। दरअसल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आवामी लीग के साफ छवि वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी है। लेकिन यहां पर एक शर्त है। यह नेता चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन आवामी लीग के सिंबल पर नहीं। इन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरना होगा। यानी पार्टी पर बैन बरकरार है। ऐसा ही कुछ पाकिस्तान में कुछ साल पहले देखने को मिला था। जब जेल में भेजे जाने के बाद इमरान खान की पार्टी पीटीआई पर बैन लगाया गया था। वहीं इमरान के उम्मीदवार निर्दलीय जीत कर आए थे।
अगस्त में बांग्लादेश चुनाव आयोग के प्रमुख एएमएम नासिर उद्दीन ने कहा था कि राष्ट्रीय चुनाव फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में होंगे। चुनाव आयोग के प्रमुख ने आगे कहा कि मतदाताओं की व्यापक उदासीनता और चुनाव प्रणाली में अविश्वास को देखते हुए चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती होगी। सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संगस्था (बीएसएस) के अनुसार, नासिर उद्दीन ने उत्तर-पश्चिमी रंगपुर जिले में एक कार्यक्रम में कहा, "लोगों का चुनाव प्रणाली, चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया में शामिल प्रशासनिक तंत्र पर से विश्वास खत्म हो गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी को आगामी चुनावों में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद चुनावी राजनीति में वापसी करने वाली जमात-ए-इस्लामी पार्टी भी दावेदारों में शामिल है। बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी, जमात को 2013 के एक अदालती फैसले के बाद चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि एक राजनीतिक दल के रूप में उसका पंजीकरण देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के विपरीत है।