Muhammad Yunus दौर के बाद बदली Bangladesh की विदेश नीति, PM Tarique Rahman ने भारत के साथ बढ़ाया सहयोग

By नीरज कुमार दुबे | Mar 11, 2026

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनूस के समय कई बार यह देखने को मिला कि वह भारत के विरोधियों और कट्टरपंथी ताकतों के करीब नजर आते थे। उस दौर में बांग्लादेश की विदेश नीति को लेकर नई चिंताएं भी सामने आई थीं और कई नेता तथा अधिकारी पाकिस्तान का दौरा करते दिखाई देते थे। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। नई सरकार के प्रधानमंत्री तारिक रहमान यह अच्छी तरह समझते हैं कि भारत के साथ मजबूत संबंध बांग्लादेश की स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। इसी कारण उन्होंने विदेश नीति में संतुलन लाते हुए भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

इसे भी पढ़ें: मोदी ने फोन करके हमारे राष्ट्रपति को... UAE ने ईरान जंग पर क्या बड़ा खुलासा कर दिया?

सूत्रों के अनुसार बांग्लादेश की रक्षा खुफिया एजेंसी के महानिदेशक मेजर जनरल कैसर रशीद चौधरी ने एक से तीन मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। यह दौरा उस समय हुआ जब बांग्लादेश में चुनाव के बाद तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद संभाला है। प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही दिन बाद उन्होंने कैसर रशीद को पदोन्नति देकर इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया था।

दिल्ली में अपने दौरे के दौरान मेजर जनरल चौधरी ने भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर एस रमन से मुलाकात की। दो मार्च को एक निजी रात्रि भोजन के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। इसमें सुरक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी के साझा उपयोग और सीमापार गतिविधियों को रोकने के उपायों पर विचार किया गया।

हम आपको बता दें कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश की जमीन से चल रही भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर सतर्क रहा है। इसलिए नई सरकार के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाना दिल्ली की प्राथमिकता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिम सरकार के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति कुछ कमजोर हुई थी और इसी कारण सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना दोनों देशों के हित में है।

बांग्लादेश में पिछले वर्ष छात्र आंदोलन के बाद राजनीतिक अस्थिरता देखी गई थी। इसी दौर में युवा नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या ने देश में तनाव और विरोध प्रदर्शनों को बढ़ा दिया था। दिसंबर में ढाका में उन पर हमला हुआ था और बाद में सिंगापुर के एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई थी। हाल ही में पश्चिम बंगाल के बोंगांव क्षेत्र से इस हत्या मामले में दो बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया है। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने इन आरोपियों से दूतावास संपर्क की मांग भी की है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नई सरकार का भारत के साथ सहयोग बढ़ाना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। अंतरिम सरकार के समय कई बार बांग्लादेश के नेता और अधिकारी पाकिस्तान का दौरा किया करते थे, जिससे क्षेत्रीय संतुलन को लेकर चिंताएं भी सामने आई थीं। लेकिन नई सरकार को यह समझ है कि भारत के साथ घनिष्ठ संबंध आर्थिक विकास, सुरक्षा और स्थिरता के लिए अत्यंत जरूरी हैं। यही कारण है कि अब बांग्लादेश के अधिकारी भारत के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इसी बीच, ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत ने बांग्लादेश की मदद कर अपने भरोसेमंद मित्र होने का परिचय दिया है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने से बांग्लादेश को ईंधन संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन समय में भारत ने पांच हजार टन डीजल की खेप बांग्लादेश को भेजी है। यह आपूर्ति दोनों देशों के बीच चल रहे ऊर्जा समझौते के तहत की गई है।

हम आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच भारत बांग्लादेश मित्रता पाइपलाइन परियोजना के माध्यम से हर वर्ष एक लाख अस्सी हजार टन डीजल आपूर्ति का प्रावधान है। यह डीजल असम के नुमालिगड तेल शोधन कारखाने से भेजा जाता है। वर्तमान संकट को देखते हुए बांग्लादेश ने अतिरिक्त आपूर्ति का अनुरोध भी किया है, जिस पर भारत उपलब्धता और बाजार स्थिति के अनुसार विचार कर सकता है।

दूसरी ओर, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। देश में ईंधन की बिक्री पर दैनिक सीमा लगाई गई है और आपूर्ति संतुलन बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालयों को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया है।

देखा जाये तो बांग्लादेश को भारत की यह सहायता केवल व्यापारिक समझौते का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि यह उसकी उस नीति को भी दर्शाती है जिसमें वह पड़ोसी देशों की कठिन समय में बिना स्वार्थ सहायता करता रहा है। नेपाल में आपदा, श्रीलंका में आर्थिक संकट या बांग्लादेश में ऊर्जा कमी जैसे कई अवसरों पर भारत ने त्वरित मदद देकर क्षेत्रीय सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

सामरिक दृष्टि से भी भारत बांग्लादेश सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों देशों की लंबी सीमा है और पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा तथा आर्थिक विकास काफी हद तक बांग्लादेश के साथ स्थिर संबंधों पर निर्भर करता है। मजबूत खुफिया सहयोग से उग्रवाद, अवैध तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने में मदद मिलती है। वहीं ऊर्जा और व्यापार सहयोग से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है।

कुल मिलाकर देखें तो यह स्पष्ट है कि भारत और बांग्लादेश के संबंध एक नए विश्वास और साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सुरक्षा सहयोग, ऊर्जा सहायता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित यह संबंध आने वाले समय में पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

प्रमुख खबरें

Exit Polls 2026 | पश्चिम बंगाल में कमल की आहट, दक्षिण में विजय का धमाका और केरल में बदलाव के संकेत

Narsimha Jayanti 2026: भक्त प्रह्लाद के लिए Lord Vishnu ने लिया था यह अवतार, जानें पूजा विधि और महत्व

उधारी का NATO और खाली कटोरा, अमेरिका-ईरान संघर्ष की तपिश Pakistan को खा रही हैं, आयात बिल ने बढ़ाई Shehbaz Sharif की चिंता

US Iran War | ठूंस-ठूंसकर भरे सूअर की तरह दम घुट रहा है, Donald Trump ने परमाणु समझौते तक ईरान की नाकेबंदी जारी रखने की धमकी दी