By नीरज कुमार दुबे | Jun 22, 2026
पश्चिम बंगाल की सीमा पर शनिवार को जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। मालदा सीमा पर सीमा सुरक्षा बल यानि बीएसएफ ने जब अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़कर वापस भेजने की कोशिश की, तब बांग्लादेश सीमा रक्षक बल और हजारों की भीड़ ने भारत की कार्रवाई रोकने का प्रयास किया। सीमा पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि स्थानीय लोगों में डर और गुस्सा फैल गया। देखा जाये तो यह केवल घुसपैठ का मामला नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता को खुली चुनौती है।
गांव की महिला चपला मंडल का बयान और भी भयावह तस्वीर पेश करता है। उन्होंने कहा कि ये घुसपैठिये गांवों में घुसकर महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित करते हैं। देखा जाये तो यह सीधा सीधा स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान पर भी हमला है। आखिर कब तक सीमावर्ती इलाकों के लोग डर और असुरक्षा में जीते रहेंगे?
बताया जा रहा है कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सीमा सुरक्षा बल को गांव वालों से सीमा क्षेत्र से दूर रहने की अपील करनी पड़ी और सीमा पर लाल झंडा तक फहराना पड़ा। यहां सवाल उठता है कि आखिर बांग्लादेश की ओर से इतनी बड़ी भीड़ अचानक कैसे इकट्ठा हो गई?
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को भी गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता कौस्तव बागची ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब उनके अपने लोग साथ नहीं खड़े हुए, तब उन्होंने सीमा पार की विभाजनकारी ताकतों से मदद मांगी। यह बयान भले राजनीतिक हो, लेकिन इससे यह जरूर स्पष्ट होता है कि घुसपैठ राजनीति का भी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोगों से घबराने की बजाय सीमा सुरक्षा बल पर भरोसा रखने की अपील की। साथ ही सांसद शांतनु ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि बांग्लादेश लगातार अपने नागरिकों को भारत में धकेलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह कभी सफल नहीं होगा। हम आपको याद दिला दें कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान घुसपैठ मुक्त बंगाल का वादा किया था और उसके बाद मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपने का निर्णय लेकर संकेत दे दिया है कि अब नरमी नहीं चलेगी।
दूसरी ओर बांग्लादेश की विदेश नीति भी तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए भारत को नजरअंदाज करते हुए मलेशिया और चीन को चुना है। चीन के साथ सत्रह समझौतों की तैयारी, तीस्ता नदी परियोजना और मोंगला बंदरगाह के आधुनिकीकरण में चीन की भागीदारी भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। खासकर तीस्ता परियोजना में चीन की घुसपैठ भारत के सिलीगुडी गलियारे के लिए रणनीतिक खतरा बन सकती है।
बांग्लादेश लगातार चीन के साथ आर्थिक और राजनीतिक रिश्ते गहरे कर रहा है, जबकि भारत के साथ संबंधों में अविश्वास बढ़ता जा रहा है। अवैध घुसपैठ, सीमा विवाद और शेख हसीना की भारत में मौजूदगी पहले ही तनाव बढ़र चुके हैं। ऐसे में सीमा पर हो रही घटनाएं केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक चुनौती का हिस्सा नजर आती हैं।
देखा जाये तो भारत ने घुसपैठ के खिलाफ जो कड़ा रुख अपनाया है और घुसपैठियों को यह जो संदेश दिया है कि भारत की सीमा कोई खुला दरवाजा नहीं है, वह काबिलेतारीफ है। एक एक घुसपैठिये को यह समझ लेना चाहिए कि जो भी अवैध तरीके से देश में घुसने की कोशिश करेगा, उसे कानून और सुरक्षा बलों की कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। सीमा पार से भीड़ जुटाकर भारत को डराने की कोशिश करने वालों को समझ लेना चाहिए कि नया भारत जवाब देना भी जानता है और अपनी सीमाओं की रक्षा करना भी। देश की सुरक्षा, सीमावर्ती नागरिकों की अस्मिता और भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।