Sangar Bari Border से भारत में घुस रहे थे Bangladeshi Infiltrators, BSF ने हाथोंहाथ सिखा दिया करारा सबक

By नीरज कुमार दुबे | Jun 06, 2026

भारत ने बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अब निर्णायक और कठोर अभियान छेड़ दिया है। सीमा सुरक्षा बल, राज्य पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां मिलकर अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान, निगरानी और वापसी की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के कूचबिहार, मेखलीगंज, चांगराबांधा, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में जिस प्रकार की गतिविधियां सामने आई हैं, उससे स्पष्ट है कि भारत अब सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है।

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दूसरी ओर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल ने आरोप लगाया है कि भारत की ओर से कुछ लोगों को बांग्लादेशी क्षेत्र में भेजने की कोशिश की गई। लालमोनिरहाट, पंचगढ़, नाओगांव और चपाइनवाबगंज जैसे इलाकों में कई लोगों को सीमा की शून्य रेखा पर रोके जाने की बात कही गई है। बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार सत्तर से अधिक लोग सीमा क्षेत्र में फंसे हुए हैं। हालांकि भारत की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत अब अवैध घुसपैठियों को लेकर बेहद सख्त नीति अपना रहा है।

उधर, सीमा पर तनाव के बीच दोनों देशों के सीमा बलों के बीच बातचीत की कोशिशें भी हुईं, लेकिन कई मामलों में सहमति नहीं बन सकी। इसके बावजूद भारत ने सीमा पर गश्त और निगरानी को और अधिक मजबूत कर दिया है। आगामी दिनों में दिल्ली में भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा समन्वय बैठक भी होने जा रही है, जिसमें इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की संभावना है।

इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी नागरिक स्वयं सीमा चौकियों पर पहुंचकर अपने देश लौटने लगे हैं। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर जांच केंद्र सहित कई सीमावर्ती स्थानों पर सैकड़ों लोग एकत्र हुए हैं, जो स्वेच्छा से बांग्लादेश वापस जाना चाहते हैं। दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में वर्षों से रह रहे ऐसे लोग अब कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से लौटने को मजबूर हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में अस्थायी निरोध केंद्र बनाए गए हैं, जहां पहचान और जैविक आंकड़ों की जांच के बाद लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

वहीं केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रहने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जो लोग स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएंगे, उनके खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल प्रशासन की सराहना भी की। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल प्रशासन ने भी अवैध घुसपैठ के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है। निर्णय लिया गया है कि पकड़े गए घुसपैठियों को पुलिस सीमा सुरक्षा बल के हवाले करेगी और उन्हें वापस भेजा जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

देखा जाये तो भारत की यह नीति केवल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता और कानून व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। अवैध घुसपैठ लंबे समय से जनसंख्या संतुलन, रोजगार, अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई थी। अब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस समस्या पर निर्णायक कार्रवाई कर रही हैं।

बहरहाल, बांग्लादेशी घुसपैठियों को यह स्पष्ट चेतावनी है कि भारत अब अवैध प्रवेश और फर्जी पहचान के खेल को किसी भी स्थिति में सहन नहीं करेगा। जो लोग बिना अनुमति भारत में रह रहे हैं, उनके पास केवल दो विकल्प हैं, या तो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं या फिर कानूनी कार्रवाई और निर्वासन का सामना करें। भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं, सुरक्षा बल सतर्क हैं और देश की संप्रभुता के साथ किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं है।

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