Bank Strike: 5-Day Work Week को लेकर इस बार सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड़ में हैं Bank Employees Unions

By नीरज कुमार दुबे | Sep 11, 2026

देशभर में आज 11 सितंबर को बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर देखने को मिला क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर चले गए। सात बैंक यूनियनों के इस साझा मंच का दावा है कि यह देश के करीब 90 फीसदी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि निजी क्षेत्र के बैंकों का कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा।

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हम आपको बता दें कि बैंक कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग है कि सप्ताह में सिर्फ पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू की जाए और सभी शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए। फिलहाल महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी होती है, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। यूनियनों का तर्क है कि वह सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमत हैं। इसके बदले सभी शनिवार को छुट्टी देने की मांग की जा रही है।

यूनियनों के मुताबिक पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह का सिद्धांत 2015 में ही स्वीकार किया गया था, जब दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया। बाद में इस मुद्दे को 2020 में फिर उठाया गया और 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते में इसे औपचारिक रूप दिया गया। बैंक यूनियनों का दावा है कि समझौते के बावजूद सरकार की अंतिम अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई है। यूनियन ने 9 सितंबर को कहा था कि इस मुद्दे पर ऑनलाइन बैठकों के दो दौर हो चुके हैं, लेकिन पांच दिन के कार्य सप्ताह पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। 8 सितंबर की सुलह बैठक में भी UFBU ने कहा कि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रगति नहीं हुई, जिसके बाद हड़ताल जारी रखने का फैसला किया गया।

इसके अलावा, बैंक कर्मचारियों का दूसरा बड़ा विरोध सरकार की Performance Linked Incentive (PLI) योजना को लेकर है। यूनियनों ने इसे वापस लेने की मांग की है। साथ ही उनका कहना है कि प्रोत्साहन योजना में बदलाव होना चाहिए और इसे यूनियनों के साथ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए तय किया जाना चाहिए। UFBU का आरोप है कि 2020 में बैंक के समग्र प्रदर्शन और मुनाफे के आधार पर कर्मचारियों को समान प्रोत्साहन देने पर सहमति बनी थी। इसके तहत बैंक के प्रदर्शन के आधार पर 5 से 15 दिनों के वेतन के बराबर प्रोत्साहन दिए जाने की बात थी। लेकिन यूनियनों के अनुसार सरकार ने इसकी बजाय ऐसी संशोधित योजना पेश की, जो व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित और भेदभावपूर्ण है तथा कर्मचारियों के बीच विभाजन पैदा करती है।

बैंक अधिकारी संगठन के नेताओं का कहना है कि शनिवार को काम करने से कर्मचारियों का वर्क-लाइफ बैलेंस भी प्रभावित हो रहा है। उनका दावा है कि पांच दिन की बैंकिंग की मांग आज की नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित है। देखा जाये तो अब गेंद सरकार के पाले में है। 11 सितंबर की हड़ताल फिलहाल एक चेतावनी है, लेकिन 28-30 सितंबर की तीन दिवसीय हड़ताल और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का अल्टीमेटम बैंकिंग व्यवस्था के लिए कहीं बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। सरकार अगर समय रहते पांच दिन के कार्य सप्ताह और प्रोत्साहन योजना जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बनाती, तो आने वाले हफ्तों में बैंकिंग सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

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