By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026
बैंक कर्मचारी संगठनों ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। संगठनों का आरोप है कि बैंक में विदेशी निवेशक को हिस्सेदारी बेचने से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था कमजोर होगी। ‘ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ (एआईबीईए) ने बयान में कहा कि बैंक की हिस्सेदारी बेचने का फैसला उचित नहीं है, क्योंकि बैंक पहले की वित्तीय मुश्किलों से उबर चुका है और हाल के वर्षों में अच्छा मुनाफा कमा रहा है।
उसका कहना है कि हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी केंद्र और एलआईसी की बैंक में कुल 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी। संगठन ने दावा किया कि आईडीबीआई के आईडीबीआई बैंक में विलय के दौरान सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि बैंक में उसकी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम नहीं होगी। प्रस्तावित निजीकरण इस आश्वासन के विपरीत है।
यूनियन के मुताबिक, आईडीबीआई बैंक ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 5,600 करोड़ रुपये, 7,500 करोड़ रुपये और 9,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। बैंक में आम लोगों की करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। संगठन ने आशंका जताई कि इस बिक्री से सार्वजनिक बचत की बड़ी राशि पर विदेशी निवेशक का नियंत्रण हो जाएगा।