By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 30, 2026
राजस्थान के बारां जिले में स्थित शाहबाद संरक्षण रिजर्व में 1,800 मेगावाट की ‘पंप स्टोरेज’ परियोजना (पीएसपी) स्थापित करने के सरकारी फैसले के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों और जनसंगठनों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। पीपुल्स ग्रीन पार्टी (पीजीपी), शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन, चंबल संसद और शाहबाद संरक्षण समिति ने एक संयुक्त मोर्चा बनाया है। मोर्चे ने कहा कि 20 नवंबर को शाहबाद क्षेत्र के हजारों किसान, सहरिया आदिवासी और युवा जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सरकार से सीधे संवाद करेंगे।
चंबल संसद के अध्यक्ष बृजेश विजय और जल क्रांतिकारी रोबिन सिंह ने कहा कि इस परियोजना के कारण शाहबाद और आसपास के करीब 500 गांव में खेती, पानी और आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए क्षेत्र की जीवनदायिनी कुनो नदी के पानी को पंप करके पुन: इस्तेमाल करने की योजना है, जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इससे भूजल के स्तर में गिरावट और क्षेत्र में सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है।
संगठनों ने कहा कि सदियों से जंगलों पर निर्भर सहरिया आदिवासी समुदाय और स्थानीय किसान इस परियोजना से प्रभावित होंगे। गब्बर यादव ने कहा कि शाहबाद का जंगल पैंथर, भालू, जरख, भेड़िए और गिद्ध जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान और राजस्थान के गांधी सागर अभयारण्य को जोड़ने वाले 17,000 वर्ग किलोमीटर के ‘‘चीता कॉरिडोर’’ का बेहद संवेदनशील हिस्सा है।
उनके अनुसार यहां बिजलीघर और बांध बनने से चीतों का अंतरराज्यीय आवागमन प्रभावित हो सकता है। पीजीपी अध्यक्ष सुधांशु ने कहा कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया और केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से दी गई सैद्धांतिक मंजूरियां रद्द नहीं की गईं, तो 20 नवंबर को शाहबाद से किसान, आदिवासी और युवा मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सरकार से संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक परियोजना से संबंधित फैसला वापस नहीं लिया जाता।