By प्रज्ञा पांडेय | Jan 22, 2026
बसंत पंचमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, इस त्योहार को सरस्वती पूजा, सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा-उपासना की जाती है तो आइए हम आपको बसंत पंचमी का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
बसंत पंचमी का पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण और विशेष माना जाता है। इस दिन सरस्वती माता की पूजा करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। पंडितों के अनुसार इसी तिथि पर सरस्वती मां का प्राकट्य हुआ था। इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। बसंत पंचमी पर इस बार ग्रहों का बहुत शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी पूरे विधि विधान सरस्वती माता की पूजा करनी चाहिए, इससे शिक्षा के क्षेत्र में लाभ प्राप्त होता है। बसंत पंचमी को श्री पंचमी, ज्ञान पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। ये हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही माता सरस्वती का प्रकाट्य हुआ था। बसंत पंचमी के दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस दिन पर कुछ खास रंग के कपड़े पहनना बहुत ही शुभ होता है।
शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का वस्त्र पहनना बहुत ही शुभ होता है। इसी दिन से ऋतुओं के राजा बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। पीला रंग बसंत ऋतु का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पीले रंग का वस्त्र पहनने से मां सरस्वती प्रसन्न होती है। इसके साथ ही इस दिन माता सरस्वती को भी पीले रंग का वस्त्र अर्पित करना चाहिए, ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा साधक पर बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीले रंग का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही महत्व है। बसंत पंचमी के दिन पीला रंग पहनने से जीवन में सकारात्मकता आती है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। पीला रंग मां सरस्वती को बेहद प्रिय है, इसलिए इस दिन इस रंग को धारण करने से माता सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। ये रंग प्रकृति से भी जु़ड़ा हुआ है। बसंत ऋतु से पीली- पीली सरसों खेतों में लहलहाने लगती है और मौसम भी बहुत सुहावना होने लगता है। बसंत पंचमी के दिन पीला रंग पहनने से एकग्रता बढ़ती है। इस रंग को धारण करने से दिमाग भी सक्रिय होता है।
इस वर्ष बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहने वाला है। इस समय में माता सरस्वती की पूजा करना शुभ रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार पीला रंग बसंत ऋतु का प्रतीक है। यह रंग फसलों के पकने, सरसों के खेतों और चारों ओर खिले पीले फूलों को दर्शाता है। पीला रंग प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत देता है। चूंकि बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है, इसलिए इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीला भोग चढ़ाते हैं, पीले फूल अर्पित करते हैं और मां सरस्वती को हल्दी का तिलक लगाते हैं। कई लोग देवी को पीली साड़ी भी चढ़ाते हैं और स्वयं नए पीले कपड़े पहनते हैं।
पंडितों के अनुसार सरस्वती पूजा के दिन कलश पर मोली बांधकर उसके ऊपर आम के पत्ते रखें। इसके बाद, कलश में दूर्वा, सुपारी, अक्षत और मुद्रा डालें। कलश के गले पर मोली लपेटकर नारियल को कलश पर रख दें। अब अपने हाथ में कुछ अक्षत लेकर वरुण देवता का कलश में आव्हान करें
'ओम त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:, अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:। (अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि, ओ३म्भूर्भुव: स्व:भो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि।)'
पंडितों के अनुसार बसंत पंचमी पर स्वच्छ होकर सबसे पहले पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी रखें। उस पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें फिर, माता सरस्वती का आचमन करके स्नान कराएं। इसके बाद, देवी को फूल माला आदि अर्पित करें। मां सरस्वती को सिंदूर, अक्षत आदि और श्रृंगार का सामान भी अर्पित करें। बसंत पंचमी के दिन माता के चरणों में गुलाल जरूर लगाना चाहिए। फिर, सरस्वती माता को वस्त्र पहनाकर विधि-विधान से पूजा अर्चना करें और उन्हें पकवानों, मिठाई, फल आदि का भोग लगाएं। बसंत पंचमी के दिन पुस्तक, कॉपी आदि की भी पूजा करना चाहिए और जरूरतमंदों को पढ़ाई का सामान दान करें। माता सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा करने के पश्चात सभी को प्रसाद बांटे। शाम के समय भी देवी सरस्वती की विधि विधान से पूजा अवश्य करनी चाहिए।
पंडितों के अनुसार सरस्वती पूजा के लिए हल्दी, कुमकुम, धूपबत्ती, इत्र, सिंदूर, रोली, अक्षत, आम के पत्ते, पीले रंग के फूल, फूलों की माला, लकड़ी की चौकी, पीला वस्त्र, कलश, पके हुए केले की फली, नारियल, भोग के लिए मालपुआ, गाय का घी, दूध से बनी मिठाई, तिल के लड्डू, गुलाल, श्रृंगार का सामान और पीले रंग की चुनरी या साड़ी की आवश्यकता होती है।
पीले रंग का संबंध बुद्धि, ज्ञान और सौभाग्य से है। हिंदू धर्म में गुरु बृहस्पति (जुपिटर), भगवान दत्तात्रेय और भगवान दक्षिणामूर्ति को भी पीले वस्त्रों में दर्शाया गया है। ये सभी देवता ज्ञान और शिक्षा से जुड़े हैं। इसलिए पीला रंग मां सरस्वती के ज्ञान स्वरूप को दर्शाता है। पीला रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि खुशी और सकारात्मकता की भावना है। मां सरस्वती को चढ़ाए जाने वाले गेंदे के फूल, भक्तों के पीले वस्त्र, सरसों के खेत और हल्दी से बनी मिठाइयां सब मिलकर इस पर्व को खास बनाते हैं।
- प्रज्ञा पाण्डेय