By अंकित सिंह | Mar 19, 2024
राजनीतिक प्रवचन में दिए गए पहले पाठों में से एक यह है कि आप जो कहते हैं उस पर ध्यान दें। और अगर चुनाव नजदीक हों तो जांच की जरूरत और भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि कई लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि राहुल गांधी के शब्द उनके और उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें क्यों पैदा कर रहे हैं। ताजा गलती मुंबई में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के भव्य समापन समारोह में हुई। गांधी शायद यह कहना चाहते थे कि भाजपा चुनाव जीतने और नेताओं को अपने साथ शामिल होने के लिए डराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और ईवीएम का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन अंत में उन्होंने जो कहा - "हिंदू धर्म में, शक्ति है, और हम उस शक्ति से लड़ रहे हैं" - ने भाजपा को विपक्ष के खिलाफ बड़ा हथियार दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहुल गांधी के बयान को बड़ा मुद्दा बना लिया है।
राहुल के बयान को लेकर मोदी अपनी हर सभा में विपक्ष पर वार कर रहे हैं। मोदी ने विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन पर मुंबई की रैली में ‘शक्ति’ के विनाश का बिगुल फूंकने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके लिए हर मां-बेटी ‘शक्ति’ का स्वरूप है और वह उनके लिए अपनी जान की बाजी लगा देंगे। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में लड़ाई ‘शक्ति के विनाशकों’ और ‘शक्ति के उपासकों’ के बीच है तथा चार जून को स्पष्ट हो जाएगा कि कौन ‘शक्ति’ का विनाश करने वाले हैं और किसे ‘शक्ति’ का आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने कहा कि आज भी मैं शक्ति की उपासना करता हूं, देश के कोटि-कोटि लोग हिंदू धर्म की इस शक्ति के उपासक हैं। मेरे लिए देश की नारी शक्ति, इसी शक्ति का प्रतिबिंब है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि ‘इंडी अलायंस’ के लोग इस ‘शक्ति’ को ‘कुचलना और तबाह’ करना चाहते हैं।
राहुल गांधी के बयान को भाजपा ने एंटी हिंदू बताना शुरू कर दिया है। जाहिर सी बात है कि हिंदू धर्म में देवी को शक्ति का रूप माना जाता है। ऐसे में भाजपा साफ तौर पर कह रही है कि विपक्ष सनातन धर्म का बार-बार अपमान करता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को विपक्ष और खासकर के राहुल गांधी के खिलाफ बड़ा हथियार मिल गया है। भाजपा राहुल गांधी के बयान के सहारे हिंदुत्व के पिच पर बैटिंग करेगी। यह कहीं ना कहीं विपक्षी दलों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। विपक्ष को भी पता है कि हिंदुत्व की राजनीति में बीजेपी को महारत हासिल है और इस तरीके का बयान उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि विपक्ष फिलहाल राहुल गांधी के इस बयान को लेकर चुप्पी साधे हुए है। वह इस बयान को बहुत ज्यादा तूल देने के पक्ष में नहीं है।