By नीरज कुमार दुबे | Oct 17, 2026
शुभेन्दु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पश्चिम बंगाल में इस बार दुर्गा पूजा महोत्सव की छटा कुछ अलग ही नजर आ रही है। भव्य पंडालों, रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाती सड़कों और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती अनूठी कलात्मक प्रस्तुतियों ने दुर्गोत्सव को विशेष आकर्षण प्रदान किया है। मां दुर्गा की आराधना के साथ इस बार कई पंडालों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, उसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भगवान श्रीराम से जुड़े विषय भी प्रमुखता से उभर रहे हैं। इसी उत्सवी माहौल के बीच केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रविवार, 18 अक्टूबर को बंगाल के दौरे पर पहुंचेंगे। बेलूर मठ में दर्शन-पूजन से शुरू होकर ऐतिहासिक शोभाबाजार राजबाड़ी और कोलकाता के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों तक उनका कार्यक्रम बंगाल की सांस्कृतिक जड़ों, आध्यात्मिक परंपराओं और दुर्गोत्सव की भव्यता से जुड़ने की पहल के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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बेलूर मठ का चयन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यह स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक और वैचारिक विरासत से जुड़ा प्रमुख केंद्र है। देखा जाये तो बंगाल की पहचान केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें साहित्य, दर्शन, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक चिंतन की भी गहरी परंपरा रही है। इसके बाद शोभाबाजार राजबाड़ी का अमित शाह का दौरा बंगाल की ऐतिहासिक बोनेदी बाड़ी पूजा यानी प्रतिष्ठित पारिवारिक दुर्गा पूजा की परंपरा से जुड़ने का अवसर देगा।
हम आपको बता दें कि बंगाल में दुर्गोत्सव का इतिहास समय के साथ व्यापक सामाजिक भागीदारी की कहानी भी कहता है। कभी संपन्न और प्रभावशाली परिवारों की राजबाड़ियों तक सीमित रहने वाली पूजा धीरे-धीरे बारोवारी और सार्वजनिक पूजा के माध्यम से आम लोगों के बड़े उत्सव में बदल गई। सामुदायिक पंडालों ने दुर्गा पूजा को अधिक व्यापक सामाजिक स्वरूप दिया। आज यही उत्सव बंगाल की सामूहिक चेतना, कलात्मक प्रतिभा और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक बन चुका है।
हम आपको बता दें कि इस वर्ष कोलकाता के कई प्रमुख पूजा पंडालों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष प्रस्तुतियां देखने को मिल रही हैं। संतोष मित्र स्क्वायर, 66 पल्ली, कालीघाट, कांकुड़गाछी मिलन मेला समिति और सोदपुर के बिजॉयपुर सार्वजनिन जैसे पूजा आयोजनों ने इस विषय को अपने पंडालों की परिकल्पना में शामिल किया है।
संतोष मित्र स्क्वायर में इस बार ‘सनातनी चेतनाय वंदे मातरम्’ की थीम के तहत लाल किले की आकृति से प्रेरित पंडाल और रोशनी से सजे भारत के मानचित्र को आकर्षण का केंद्र बनाया गया है। वहीं, न्यू अलीपुर के सुरुचि संघ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वें जन्मवर्ष के अवसर पर ‘उत्स’ यानी उद्गम विषय के माध्यम से उनके जीवन को प्रदर्शित किया है। प्रतिमाओं, तस्वीरों और समाचार-पत्रों की कतरनों के जरिए उनके जीवन और योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया है। इन प्रस्तुतियों में पूजा समितियों की कलात्मक कल्पनाशीलता के साथ इतिहास और राष्ट्रभाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश भी दिखाई देती है।
साथ ही दुर्गा पूजा से पहले कोलकाता की सड़कों, पुलों और फ्लाईओवरों को भी रंगीन रूप दिया गया है। गड़ियाहाट और रेड रोड जैसे इलाकों में पीले, नारंगी, गुलाबी, हरे और लाल रंगों की पट्टियों के साथ पारंपरिक बंगाली अल्पना की कलाकृतियां उत्सव का वातावरण बना रही हैं। शहर की सजावट और पंडालों की भव्यता ने दुर्गोत्सव के दृश्यात्मक आकर्षण को और बढ़ाया है। हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में ‘नवपत्रिका’ के पारंपरिक स्नान के साथ दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई। ‘नवपत्रिका’ का अर्थ नौ पौधों के समूह से है। दुर्गा पूजा आयोजकों ने साड़ी में लिपटी ‘नवपत्रिका’ को धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार स्नान कराने के लिए गंगा और अन्य नदियों तथा जलाशयों के तटों की ओर रुख किया। कोलकाता में सुबह से ही पंडालों में लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मौसम अनुकूल रहने के कारण बड़ी संख्या में लोग शहर में भव्य रूप से सजाए गए पूजा पंडालों को देखने के लिए निकले। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मौके पर लोगों को शुभकामनाएं दीं, जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में गये। इस वर्ष महा सप्तमी के अनुष्ठान दो दिन तक चलेंगे। सप्ताहांत होने के कारण त्योहार का उत्साह और बढ़ गया है।
देखा जाये तो भाजपा के लिए इस बार का दुर्गोत्सव केवल धार्मिक आयोजनों में भागीदारी का अवसर नहीं, बल्कि बंगाल के समाज और उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं के साथ जुड़ाव मजबूत करने की भी कसौटी है। अमित शाह का बेलूर मठ और ऐतिहासिक पूजा स्थलों का प्रस्तावित दौरा इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। बंगाल की सांस्कृतिक पहचान बहुलतावादी रही है। यहां दुर्गा पूजा आस्था के साथ कला, साहित्य, सामाजिक सहभागिता और लोकजीवन का उत्सव भी है।
फिलहाल, रंगों से सजी सड़कों, भव्य पंडालों, ऐतिहासिक विषयों और राष्ट्रभाव से जुड़ी प्रस्तुतियों के बीच बंगाल का दुर्गोत्सव एक बार फिर अपने विराट स्वरूप में सामने है। भाजपा शासन में आयोजित हो रहा यह पहला दुर्गा पूजा महोत्सव राजनीतिक दृष्टि से भले ही विशेष महत्व रखता हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, बंगाल की कलात्मक प्रतिभा और जनभागीदारी की जीवंत परंपरा ही है। अमित शाह का दौरा इसी उत्सवी माहौल में सांस्कृतिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रहा है। साथ ही इस बार भाजपा सरकार की ओर से मिले सहयोग और समर्थन के चलते पूजा समितियों में भी उत्साह और संतोष का माहौल दिखाई दे रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि सरकारी सहयोग से दुर्गोत्सव और अधिक भव्य एवं व्यवस्थित रूप ले सकेगा। बहरहाल, हर हिंदू बिना किसी डर या बाधा के पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा कर पा रहा है, ऐसा माहौल बनाने में मिली सफलता भाजपा सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि की तरह है।
-नीरज कुमार दुबे