Prabhasakshi NewsRoom: भारत ने शुरू की भविष्य के युद्ध की तैयारी, Military Quantum Mission से पूरी तरह बदलेगा रणक्षेत्र

By नीरज कुमार दुबे | Jan 23, 2026

देश की सैन्य तैयारी के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ तब सामने आया जब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने मिलिटरी क्वॉन्टम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया। यह दस्तावेज आने वाले दशकों की युद्ध सोच का खाका है। इसका मकसद साफ है कि भारतीय सशस्त्र बल तकनीक केंद्रित भविष्य के युद्ध के लिए आज से ही खुद को तैयार करें। हम आपको बता दें कि इस नीति के तहत क्वॉन्टम तकनीक के चार मजबूत स्तंभों को थल सेना, नौसेना और वायु सेना में एक साथ जोड़ा जाएगा। इनमें क्वॉन्टम संचार, क्वॉन्टम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी तथा क्वॉन्टम पदार्थ और उपकरण शामिल हैं। लक्ष्य यह है कि भविष्य के रणक्षेत्र में सूचना की रफ्तार, गणना की ताकत और सेंसर की सटीकता में भारत किसी से पीछे न रहे बल्कि तकनीकी बढ़त हासिल करे।


इस अवसर पर थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित मौजूद रहे। यह उपस्थिति अपने आप में संदेश थी कि यह नीति तीनों सेनाओं की साझा प्राथमिकता बनेगी।

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हम आपको बता दें कि दस्तावेज में राष्ट्रीय क्वॉन्टम मिशन के साथ सैन्य प्रयासों के तालमेल पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें स्पष्ट रोडमैप है कि किस तरह नागरिक और सैन्य क्षेत्रों के साझा प्रयासों से इस उभरती तकनीक को रक्षा ढांचे में शामिल किया जाएगा। अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को मिलाकर समर्पित संचालन निकाय बनाने की बात भी कही गई है। यह नीति इस सच्चाई को रेखांकित करती है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में संयुक्तता और एकीकरण के बिना तकनीकी वर्चस्व संभव नहीं है।


देखा जाये तो यह नीति रणनीतिक चेतावनी भी है। दुनिया तेजी से उस दौर में जा रही है जहां युद्ध बंदूक और टैंक से नहीं बल्कि एल्गोरिदम और क्यूबिट से जीते जाएंगे। ऐसे में भारत का यह कदम निर्णायक है। सवाल यह नहीं कि क्वॉन्टम तकनीक आएगी या नहीं, सवाल यह है कि कौन इसे पहले और बेहतर तरीके से हथियाता है। क्वॉन्टम नीति का मतलब है रक्षा व्यवस्था में ऐसी तकनीकों का प्रवेश जो परंपरागत सोच को तोड़ देती हैं। क्वॉन्टम संचार दुश्मन की जासूसी को लगभग असंभव बना सकता है। क्वॉन्टम कंप्यूटिंग आज की सबसे ताकतवर मशीनों से भी लाखों गुना तेज गणना की क्षमता रखती है। क्वॉन्टम सेंसिंग से पनडुब्बियों की पहचान, मिसाइलों की सटीकता और सीमा पर गतिविधियों की निगरानी एक नए स्तर पर पहुंच सकती है। क्वॉन्टम पदार्थ और उपकरण हथियार प्रणालियों को हल्का, तेज और ज्यादा घातक बना सकते हैं।


इसके सामरिक प्रभाव दूरगामी और गहरे हैं। पहला प्रभाव यह है कि कमांड और कंट्रोल सिस्टम लगभग अभेद्य बन सकते हैं। दूसरा यह कि निर्णय लेने की गति इतनी तेज होगी कि दुश्मन को प्रतिक्रिया का मौका ही नहीं मिलेगा। तीसरा यह कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भारत की स्थिति आक्रामक और प्रभुत्वशाली हो सकती है। चौथी और सबसे अहम बात यह है कि परमाणु प्रतिरोध की विश्वसनीयता भी नई ऊंचाई पर जाएगी क्योंकि संचार और चेतावनी प्रणालियां कहीं ज्यादा भरोसेमंद होंगी। बहरहाल, युद्ध की अगली पीढ़ी प्रयोगशालाओं में आकार ले रही है और वहां साहस ही सबसे बड़ा हथियार है। मिलिटरी क्वॉन्टम मिशन नीति ने देश को सही दिशा दिखा दी है।

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