By एकता | May 01, 2026
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया, जो सर्वसम्मति से पारित हो गया। यह कदम तब उठाया गया जब कुछ दिन पहले ही आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। सरकार ने इस प्रस्ताव के जरिए यह साबित किया कि पंजाब के विधायकों का अपनी पार्टी और मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है।
पंजाब की 117 सीटों वाली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के पास भारी बहुमत है। सदन में आप के 94 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 16, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के तीन, भाजपा के दो, बसपा का एक और एक निर्दलीय विधायक है। सत्र के लिए पार्टी ने अपने सभी विधायकों को व्हिप जारी कर मौजूद रहने का आदेश दिया था।
हाल ही में 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को तब बड़ा झटका लगा था, जब उसके 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने एक साथ भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालिवाल और संदीप पाठक जैसे बड़े नाम शामिल थे। राज्यसभा के सभापति ने भी इसे मंजूरी दे दी है, जिसके बाद ऊपरी सदन में आम आदमी पार्टी के अब केवल 3 सांसद रह गए हैं। इसी राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में अपना बहुमत साबित कर विरोधियों को जवाब दिया है।