By अंकित सिंह | Oct 27, 2026
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी पर राज्य विधानसभा में जानबूझकर व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष अक्सर सदन से वॉकआउट (बाहर जाना) करता है और सत्र बुलाने की मांग करने के बावजूद कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेता है। मान की यह टिप्पणी उस समय आई है जब कांग्रेस विधायकों को कथित तौर पर विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोके जाने के बाद तनाव बढ़ गया है।
डॉ. बलबीर सिंह ने कांग्रेस सदस्यों पर राजनीतिक व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया, क्योंकि उन्होंने मंत्री को प्रेस से बात करने से रोका था। जैसे ही 'प्रश्नकाल' (Question Hour) शुरू हुआ, बाजवा ने कांग्रेस विधायकों को प्रवेश न दिए जाने का कड़ा विरोध किया। इसके चलते सदन के भीतर कांग्रेस विधायकों ने विरोध-प्रदर्शन किया। स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने स्पष्ट किया कि किसी भी विधायक को विधानसभा में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता, सिवाय उन लोगों के जिन्हें निलंबित किया गया हो। बाजवा ने आगे आरोप लगाया कि उनके प्रवेश को रोकने वाले नोटिस पर स्पीकर के हस्ताक्षर नहीं थे।
उन्होंने इस रोक की निंदा करते हुए कहा कि पंजाब के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी चुने हुए प्रतिनिधि को विधानसभा में प्रवेश करने से रोका गया हो। भले ही सुखपाल सिंह खैरा निलंबित थे, फिर भी उन्हें विधानसभा परिसर में प्रवेश करने का अधिकार है; इसके बाद स्पीकर उनसे कार्यवाही में भाग न लेने के लिए कह सकते हैं। मैंने स्पीकर से यह भी पूछा: क्या यह पंजाब की विधानसभा है या काबुल? क्या यहाँ तालिबान का शासन है, या भारत का संविधान लागू होता है? लेकिन स्पीकर ने जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा। मैंने सचिव द्वारा जारी किए गए बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस का मुद्दा भी उठाया—आखिर बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस का पालन करने की उम्मीद किससे की जा सकती है?