रचनाकार ही नहीं संगीतकार भी थे भगवती चरण वर्मा

By प्रज्ञा पाण्डेय | Aug 30, 2019

भगवती चरण वर्मा हिन्दी के जाने माने उपन्यासकार हैं। उन्होंने मनोविज्ञान, दर्शन और समाज पर  भी किताबें लिखीं। इसके अलावा वह छायावादी कवि और व्यंगकार भी थे। 30 अगस्त को भगवती चरण वर्मा की जन्मदिवस है तो आइए हम आपको भगवती चरण वर्मा के विषय में बताते हैं।

भगवती चरण वर्मा का जन्म उन्नाव जिले के शफीपुर गांव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी किया था। उसके बाद उन्होंने कविता लिखने का काम किया। उसके बाद विचार नामक का साप्ताहिक और नवजीवन का संपादन किया। इस प्रकार उन्होंने लेखन में ही पत्रकारिता में भी प्रमुख कार्य किया है।

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भगवती चरण वर्मा की खास बातें

उन्होंने उपन्यासों की परम्परागत शैली से हटकर नए विधि विकसित की। साथ ही उन्होंने बम्बई में फिल्म लेखन का भी काम किया। इसके अलावा नवजीवन का संपादन किया। आकाशवाणी के कुछ केन्द्र पर कार्य करते रहे। उनके उपन्यास चित्रलेखा पर दो बार फिल्म भी बनायी गयी है। 


पुरस्कार 

उनकी रचना भूले बिसरे चित्र के लिए साहित्य अकादमी से पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा पद्मभूषण और राज्यसभा से मानद सदस्यता प्राप्त थी। उनकी रचना भूले बिसरे चित्र में स्वतंत्रता आंदोलन के तीन पीढ़ियों का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया है। 

  

प्रमुख रचनाएं

तीन वर्ष, अपने खिलौने, भूले-बिसरे चित्र,पतन, चित्रलेखा, टेढ़ेसीमा, रेखा, वह फिर नहीं आई, सबहिं नचावत राम गोसाईं, धुप्पल (उपन्यास); युवराज चूण्डा, प्रतिनिधि कहानियाँ, मेरी कहानियां, अतीत के गर्त से, मोर्चाबंदी तथा सम्पूर्ण कहानियां (कहानी संग्रह), प्रश्न और मरीचिका, मेरी (कविता-संग्रह); वसीयत (नाटक); कहि न जाय का कहिए (संस्मरण): साहित्य के सिद्धांत तथा रूप (साहित्यालोचन) और मेरे नाटक प्रमुख रचनाएं थीं। 

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इसके अलावा कवि के रूप में भगवतीचरण वर्मा के रेडियो रूपक 'महाकाल', 'द्रोपदी'' और कर्ण' 1956 ई. 'त्रिपथगा' में छपे। 'त्रिपथगा' उनकी कृतियों का एक संकलन है। हालांकि उनकी प्रसिद्ध कविताओं में  'भैंसागाड़ी' का खास महत्व है। इस कविता का आधुनिक हिन्दी कविता के इतिहास में अपना महत्त्व है। 'भैंसागाड़ी' कविता में मानववादी दृष्टिकोण उभर कर समाने आता है। साथ ही इस कविता में काव्य के प्रगतिवादी तत्व नजर आते हैं।  इन कविता संग्रह के माध्यम से प्रगतिवादी प्रसिद्ध हो गयीं। साथ ही भगवती चरण वर्मा का पहला कविता संग्रह 'मधुकण' नाम से 1932 ई. में प्रकाशित हुआ। उसके बाद दो और काव्य संग्रह 'प्रेम संगीत' और 'मानव' निकले। इन कविता संग्रह को किसी 'वाद' विशेष के तहत नहीं माना जाता है। इन कविताओं की विशेषता में नियतिवाद, रूमानियत, प्रगतिवाद और मानववाद प्रमुख है।

रचनाकार के साथ संगीतकार भी थे भगवती चरण वर्मा 

भगवती चरण वर्मा केवल रचनाकार ही नहीं थे बल्कि संगीतकार भी थे। उन्हें संगीत, वीणा या सितार का शौक नहीं था बल्कि उन्हें हारमोनियम बजाना पसंद था। 

हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार भगवती चरण वर्मा ने हिन्दी साहित्य की बहुत सेवा की। उनकी कालजयी रचनाओं के लिए हिंदी साहित्य हमेशा ऋणी रहेगा। भगवतीचरण वर्मा का निधन 5 अक्टूबर, 1981 ई. को हुआ था। आज के दिन भगवतीचरण वर्मा भले ही इस दुनिया में हमारे साथ नहीं हैं लेकिन वे उनकी रचनाएं उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व की याद दिलाते रहेंगी। उनकी स्मृतियां हमेशा हमारे मन में मौजूद रहेंगी।

प्रज्ञा पाण्डेय

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