वृंदावन का रहस्यमयी Bhandirvan, जहां स्वयं Brahma Ji ने कराया था Radha-Krishna का दिव्य विवाह: जानिए इसका इतिहास

By दिव्यांशी भदौरिया | Aug 07, 2026

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि ब्रज अत्यंत अलौकिक और रहस्यमयी माने जाते हैं। असल में वृंदावन के 12 मुख्य वनों में शामिल भांडीरवन एक ऐसा ही परम पवित्र स्थल है, जो श्री राधा-कृष्ण के अनोखे और दिव्य विवाह का साक्षी बना है। यहां के लोकल लोगों का मानना है कि राधा-कृष्ण का सांसारिक विवाह नहीं हुआ था, हालांकि शास्त्रों और ब्रज की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, स्वयं जगत्पिता ब्रह्मा जी ने भांडीरवन में आचार्य बनकर दोनों का विवाह संपन्न करवाया था। वैसे यह पावन स्थल आज भी भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत केंद्र है, जहां कदम रखते ही आलौकिक शांति का अनुभव प्राप्त होता है। आइए आपको बताते हैं भांडीरवन के पौराणिक इतिहास, इसकी रहस्यमयी कथा और अन्य महत्वपूर्ण बातें।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय नंदबाबा रूपी श्रीकृष्ण को गोद में लेकर भांडीरवन से गुजर रहे थे। उसी दौरान भगवान की इच्छा से अचानक भयंकर आंधी-तूफान आ गया। नंदबाबा घबरा गए और कृष्ण को सुरक्षित रखने के लिए एक विशाल वटवृक्ष के नीचे खड़े हो गए। इसी दौरान वहां श्री राधारानी का प्राकट्य हुआ। नंदबाबा दोनों को दिव्य स्वरुप से भली-भांति परिचित थे, उन्होंने बाल-कृष्ण को राधा जी की गोद में सौंप दिया और प्रणाम कर वहां से चले गए। 

जब नंदबाबा यहां से चले गए तो आंधी थम गई और श्रीकृष्ण ने अपना पूर्ण पुरुषोत्तम रुप धारण कर लिया है। फिर  बाद में भगवान की योगमाया शक्ति से वहां ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्री राधा और कृष्ण का विवाह संस्कार संपन्न करवाया।

भांडीरवन की मुख्य विशेषताएं

राधा-कृष्ण मुख्य मंदिर

 - विवाह स्थल मंदिर- आपको बता दें कि, भांडीरवन के मुख्य मंदिर में एक विशाल पेड़ के नीचे श्री राधा-कृष्ण की मूर्तियां हैं, जहां वे एक-दूसरे को वरमाना पहना रहे हैं और ब्रह्मा जी विवाह की रस्में पूरी करा रहे हैं।

- बलराम जी का मंदिर- यहां पर विवाह स्थल के पास ही बलराम जी का मंदिर स्थित है। यह वह स्थान है, जहां बलराम जी ने कंस द्वारा भेजे गए दैत्य प्रलंबसुर का वध किया था।

भांडीरवन का गोपनीय रहस्य

- एक कल्प भजन का पुण्य- श्रीमद्भागवत के मुताबिक, भांडीरवन में 1 घंटा बिताना 1 कल्प (करीब 4.32 अरब वर्ष) तक लगातार भजन-कीर्तन करने के समान फलदायी मानी गई है।

- राधारानी की अनुकंपा- धार्मिक मान्यता है कि यहां वहीं श्रद्धालु आते हैं, जिन्हें राधारानी बुलाती हैं।

 

पास में स्थित वंशीवट का अद्भुत रहस्य

भांडीरवन से करीब 600 मीटर की दूरी पर स्थित वंशीवट अत्यंत रमणीक स्थान है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर श्री कृष्ण अपने ग्वाल-बालों के साथ बैठकर भोजन किया करते थे और अपनी मधुर वंशी बजाकर राधारानी व गोपियों को बुलाते थे। यहां भी एक खास वृक्ष हैं, धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई सच्चा साधक अपने कान इस पेड़ के तने पर लगाए, तो उसे आज भी रासलीला के मृंदग की मधुर ध्वनि सुनाई देती है।

कैसे पहुंचे भांडीरवन?

- टैक्सी या पर्सनल वाहन- वृंदावन से हाईवे मार्ग से यह करीब 21 किमी की दूरी पर है, जहां कैब या अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

- बाइक या यमुना मार्ग- मानसून के अलावा, आप अन्य किसी भी दिनों में केशी घाट से यमुना पार करके बेलवन होते हुए मात्र 8 किमी में भांडीरवन पहुंचा जा सकता है।

प्रमुख खबरें

Irfan Pathan ने Babar Azam की Fake News का किया खुलासा, बताया क्यों नहीं देते जवाब

PM Modi-Sukhbir Badal की दिल्ली में मुलाकात, 2027 Punjab चुनाव में BJP-SAD गठबंधन के संकेत?

PM Modi का बड़ा संकेत: Delimitation Bill अब आकर रहेगा! NDA के पास पूरा संख्या बल

Hardik Pandya ट्रेड पर R Ashwin का बड़ा प्लान, MI को KKR से चाहिए ये दो स्टार!