By दिव्यांशी भदौरिया | Jun 07, 2026
हिंदू धर्म भानु सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव को जल अर्पित करने से कुंडली दोष दूर हो जाते हैं। सप्तमी तिथि सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से भगवान सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से अंधकार को दूर कर देते हैं।
सूर्य से जुड़े शुभ-अशुभ प्रभाव
अगर आपकी कुंडली में सूर्य देव के कमजोर हैं, तो ऐसे जातक को वर्कप्लेस पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, मेहनत का क्रेडिट नहीं मिलता और कारोबार में बाधाएं आती हैं। जब सूर्य मजबूत होते हैं, तो व्यक्ति में लीडरशिप क्वालिटी आती है। वहीं, सरकारी नौकरी के योग बनते हैं और कारोबार में सही फैसले लेने की समझ आ जाती है।
सही तरह से अर्घ्य देने की विधि
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और फिर साफ वस्त्र धारण कर सकते हैं।
- अर्घ्य को हमेशा तांबे के लोटे से देना शुभ माना जाता है। इसलिए भूलकर भी स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तनों का इस्तेमाल न करें।
- तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर। इसमें थोड़ा-सा लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल रंग के फूल डालें। अगर बिजनेस में सफलता चाहते हैं, तो जल में थोड़ी मिश्री भी मिलाएं।
- इसके बाद सूर्य देव के सामने खड़े होकर लोटे को अपने दोनों हाथों से पकड़ें। फिर हाथ को सिर से ऊपर तक ले जाएं। धीरे-धीरे जल को चढ़ाएं।
- इस बात का ध्यान रखें कि जल चढ़ाते समय आपकी नजर सीधे सूर्य पर नहीं, बल्कि गिरती हुई जल धारा के बीच आने वाली सूर्य की किरणों पर होनी चाहिए।
इन मंत्रों का जप करें
- जब आप जल अर्पित करें, तो ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप कम से कम 11 बार करें। अर्घ्य पूरा होने के बाद उस स्थान पर क्लॉकवाइज तीन बार परिक्रमा करें और गिरे हुए जल को अपने माथे और आंखों पर जरुर लगाएं।
- पूजा की आखिरी में भगवान सूर्य की भाव के साथ आरती करें।
- इस बात का ध्यान भी रखें कि, जब आप जल अर्पित करें, तो जल की बूंदें आपके पैरों पर न पड़ें। इसके लिए आप कोई गमला या थाली रख सकते हैं या फिर उस जल को बाद में पौधे को जड़ में डाल सकते हैं।