आम लोगों की समस्याओं को उठाने वाले साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं भीष्म साहनी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 11, 2020

विभाजन की त्रासदी पर तमस जैसी कालजयी रचना लिखने वाले भीष्म साहनी आधुनिक हिन्दी साहित्य में सशक्त अभिव्यक्ति और बेहद सादगी पसंद रचनाकार के रूप में विख्यात हैं। समीक्षकों के अनुसार साहनी एक प्रतिबद्ध लेखक थे जिन्होंने अपने साहित्य में हमेशा मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दी। उपन्यासों के अलावा अहं ब्रह्मास्मि, अमृतसर आ गया और चीफ की दावत जैसी उनकी कहानियां सशक्त अभिव्यक्ति के कारण काफी चर्चित रहीं।

इसे भी पढ़ें: बंकिम बाबू ने अपने आलेखों से राष्ट्रीयता का असली अर्थ समझाया

बहुमुखी प्रतिभा के धनी भीष्म साहनी आम लोगों की आवाज उठाने और हिंदी के महान लेखक प्रेमचंद की जनसमस्याओं को उठाने की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले साहित्यकार के तौर पर पहचाने जाते हैं। विभाजन की त्रासदी पर ‘तमस’ जैसे कालजयी उपन्यास लिखने वाले साहनी ने हिंदुस्तानी भाषा के उपयोग को बढ़ावा दिया।

विभाजन के बाद वह भारत आ गए। बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में साहनी ने उनके भारत आने की परिस्थिति का उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि वह स्वतंत्रता समारोह का जश्न देखने रावलपिंडी से सप्ताह भर के लिये दिल्ली आये थे। उनकी पंडित नेहरू को लालकिले पर झंडा फहराते और हिन्दुस्तान की आजादी का जश्न देखने की हसरत थी। लेकिन जब वह दिल्ली पहुंचे तो पता चला कि गाडियां बंद हो गयीं और फिर उनका लौटना नामुमकिन हो गया। भीष्म साहनी ने तमस के अलावा झरोखे, बसंती, मय्यादास की माडी जैसे उपन्यासों और हानूश, माधवी, कबिरा खड़ा बाजार में जैसे चर्चित नाटकों की भी रचना की। भाग्यरेखा, निशाचर, मेरी प्रिय कहानियां उनके कहानी संग्रह हैं।

इसे भी पढ़ें: सीधे-सरल और स्पष्ट इंसान थे गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी

स्वाभाविक रूप से उनकी रुचि अभिनय में थी और वह फिल्मों की ओर भी आकर्षित हुए। बेहद सादगी पंसद रचनाकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर साहनी को पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

उनके उपन्यास भरोखे, तमस, बसंती, मैय्यादास की माडी, कहानी संग्रह भाग्यरेखा, वांगचू और निशाचर, नाटक हानूश, माधवी, कबीरा खड़ा बाजार में, आत्मकथा बलराज माई ब्रदर और बालकथा गुलेल का खेल ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। साहनी ने कुछ समय अपने बड़े भाई एवं फिल्म अभिनेता बलराज सहानी के साथ मुंबई में रंगमंच पर भी काम किया था। साहनी की कृति पर आधारित तमस धारावाहिक काफी चर्चित रहा था। उनके बसंती उपन्यास पर भी धारावाहिक बना था। उन्होंने मोहन जोशी हाजिर हो, कस्बा और मिस्टर एंड मिसेज अय्यर फिल्म में अभिनय भी किया था। प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले इस लेखक का निधन 11 जुलाई 2003 को दिल्ली में हुआ।

प्रमुख खबरें

Privacy पर छिड़ी बहस के बीच Meta का बड़ा एक्शन, AI Glasses में छेड़छाड़ पर बंद होगा Camera

Wimbledon में भारतीय टेनिस का नया सितारा, Arnav Paparkar 36 साल बाद Junior Quarter-Final में।

FIFA World Cup में रेफरी पर बड़ा बवाल, Argentina से हार के बाद मिस्र ने FIFA में दर्ज कराई शिकायत

Hormuz में हमलों से Crude Oil में लगी आग, US-Iran तनाव से भारत की भी बढ़ी टेंशन।